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उप्र की जनता आर्थिक रूप से टूट चुकी है डॉक्टर हिलहाल अहमद

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लखनऊ, 02 नवम्बर 2021

      भारत का सबसे बड़ा त्यौहार 02 नवम्बर 2021 से आरम्भ हो रहा है। यह त्यौहार धार्मिक कारणों से ही महत्वपूर्ण नहीं है यह त्यौहार देश के आर्थिक खुशहाली का भी मापक है। त्यौहार से ठीक एक दिन पूर्व भाजपा की मोदी सरकार ने देश एवं प्रदेश वासियों को 266 रूपये कामर्शियल सिलेण्डर के दामों में वृद्धि कर उसे 2000 रूपये के पार पहुंचा दिया। भारतीय जनता पार्टी का यह उपहार देश, प्रदेशवासी आने वाले लम्बे समय तक याद रखेंगें। वैसे तो मोदी सरकार प्रतिदिन 35 पैसे पेट्रोल और डीजल के दाम पिछले दस दिनों से बढ़ा रहें हैं, इसको भी प्रदेशवासी मोदी सरकार के उपहार के रूप में विधानसभा चुनाव तक याद रखेंगें। 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता योगी सरकार को रिर्टन गिफ्ट निश्चित रूप से देगी।

आरबीआई के द्वारा जारी रिपोर्ट में यह बताया है कि उत्तर प्रदेश की जनता की प्रति व्यक्ति आय 2018-2019 की तुलना में 6.06 प्रतिशत घट गयी है, यदि सरकारी आंकड़ों को मान लिया जाए तो इस वक्त मंहगाई दर लगभग 5 प्रतिशत से कुछ अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि आज उत्तर प्रदेश की जनता आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने बड़े गर्व से बताया था कि प्रदेश की 18 करोड़ जनता गरीबी रेखा से नीचे आ गयी हैं, और रोज लाइन लगाकर बीपीएल के राशन कार्ड से अपना गुजारा करती है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. हिलाल अहमद ने कहा कि सरकार के मुद्रास्फिति के आकड़ों को यदि हम बाजार में जाकर देखें तो यह पूरी तरह से झूठ नजर आता है। सब्जी के दाम एक माह में दोगुने से ज्यादा हो गये है। केवल सरसों का तेल एक वर्ष में 45 प्रतिशत की वृद्धि दिखा रहा है। गैस सिलेंडर के दाम दोगुने से अधिक हो गये है। डीजल एवं पेट्रोल के दाम 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि, परन्तु सरकार के कागजों में महंगाई दर में वृद्धि केवल 5 प्रतिशत ही है। यह आकड़ों बाजीगरी किसकों मुर्ख बनाने के लिए कर रहें हैं, यदि सरकार आकड़े सच है तो भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं मंत्री मंहगाई के प्रश्न से क्यां कतराते घूम रहें हैं।

उत्तर प्रदेश की जनता आर्थिक रूप से बदहाल प्रदेश तथा योगी सरकार के भ्रष्ट शासन से छुटकारा पाने के लिए कांग्रेस में ही एक मात्र आशा की किरण देख रही है। इसका मुख्य कारण है प्रियंका गांधी द्वारा कांग्रेस की घोषित प्रतिज्ञाएं, जिसमें बेरोजगारों, किसानों, कोरोना पीड़ितों तथा महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए एक सुनियोजित आर्थिक नीति दिखाई दे रही है।

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