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जगन्नाथ अग्रवाल द्वारा निर्मित रौज़ा-ए-काज़मैन की जर्जर अवस्था पर बोले:मौलाना यासूब अब्बास

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लखनऊ:उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ यहां की तहज़ीब व ऐतिहासिक धरोहर हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है ।
उसी की एक मिसाल लखनऊ स्थित रौज़ा-ए-काज़मैन भी है ।
जिसको नवाब अमजद अली शाह के करीबी जगन्नाथ अग्रवाल ने 1843 में बनवाया था ।इस रौजे़ में जहां इमाम मूसी काज़िम (अ,स) इमान मोहम्मद तक़ी (अ.स) के रौज़ा के साथ-साथ मस्जिद-ए-कूफा भी है ।

इस रौज़ा में पूरे मोहर्रम धार्मिक कार्यक्रम होते हैं ।जिसमें हजारों-लाखों की संख्या में लोग जमा होते और कर्बला के शहीदों का ग़म मनाते हैं ।
वही 19 रमज़ान से 21 रमज़ान प्रॉफिट मोहम्मद के दमाद पहले इमाम हज़रत अली की शहादत की मौक़े पर लाखों की तादात में देश व प्रदेश से लोग जमा हो कर इमाम की शहादत का ग़म मनाते हैं।
यह रौज़ा भी लखनऊ की और ऐतिहासिक इमारतों की तरह हुसैनाबाद ट्रस्ट की संपत्ति है ।

जिसके चेयरपर्सन लखनऊ जिलाधिकारी है ।
आज लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतें जैसे ग़ार की कर्बला , इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद, शाहनजफ इमामबाडो से जैसे जिला प्रशासन ने मुंह मोड़ रखा हैै जिसकी वजह से धीरे-धीरे यह इमारतें बोसीदा होती जा रही है ।
जबकि हुसैनाबाद ट्रस्ट की इन संपत्ति से जिलाप्रशासन की मोटी कमाई होती है।
इस कमाई को इन इमारतों की मेंटेनेंस ,देखरेख में नहीं लगाया जा रहा है। जिसकी वजह से उपरोक्त इमामबाड़ो की तरह जगन्नाथ अग्रवाल द्वारा निर्मित इमामबाड़ा काज़मैन भी उन इमारतों की तरह जर्जर अवस्था में पहुंच गई है।
इस इमामबाड़े की देखरेख करने वाली अंजुमान काज़मिया आब्दिया के सदस्य नयाब साहब, ज़की साहब,नसीर अहमद साहब ने ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सिगरेटरी एवं प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास को रौज़ा-ए-काज़मैन की जर्जर अवस्था व अवैध कब्ज़ो के बारे में सूचना दी,
सूचना पाते ही मौलाना यासूब अब्बास ने रौज़ा-ए-काज़मैन का जायजा लिया।
मौलाना ने इस ऐतिहासिक इमारत को देखकर अफसोस जाहिर किया व अंजुमन के सदस्यों को आश्वासन दिलाया कि शाहनजफ इमामबाड़े की तरह इस इमामबाड़े को भी बनवाने के लिए शासन- प्रशासन से जल्द से जल्द मरम्मत करवाने एवं अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई करवाई जाएगी ।
उन्होंने कहा कि मोहर्रम बहुत करीब है और इस इमामबाड़े में इमाम का ग़म मनाने एवं पुरसा देने के लिए लाखों की संख्या में लोग जमा होते हैं।
इस इमामबाडेी की जर्जर अवस्था को देखते हुए खुदा ना करे कोई हादसा हो, इससे पहले इसकी मरम्मत वह अतिक्रमण हटाने की अत्यधिक आवश्यकता है इस मौके पर मौलाना ने क़ौम के लोगों से आग्रह किया है कि अपनी ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए अपनी आवाज बुलंद करें

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