यूरोप के एक छोटे देश लिथुआनिया ने चीन की अगुआई वाले सीईईसी (चीन और मध्य-पूर्वी यूरोपीय देशों के बीच सहयोग) से अलग होने का फ़ैसला किया है. 28 लाख से भी कम आबादी वाले लिथुआनिया के इस फ़ैसले को सीधे-सीधे चीन को चुनौती देना माना जा रहा है.
वर्ष 2012 में चीन ने ये सहयोग फ़ोरम बनाया था. इसे 17+1 भी कहा जाता है. लिथुआनिया ने न सिर्फ़ अपने को इस फ़ोरम से अलग किया है, बल्कि बाक़ी सदस्य देशों से भी हटने की अपील की है.
लिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रिलियस लैंड्सबर्गिस ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, “लिथुआनिया अब इस फ़ोरम का सदस्य नहीं है और वो इस पहल में हिस्सा नहीं लेगा.” उन्होंने इस प्लेटफ़ॉर्म को विभाजनकारी कहा. उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को चीन के साथ मिलकर संवाद करना चाहिए