अब कोरोना वायरस की वैक्सीन पर भी हिंदू-मुस्लिम का राग छिड़ गया है।
मुंबई में कोरोना वैक्सीन को लेकर मौलानाओं ने जारी किया है, जिसके बाद नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि कोरोना वैक्सीन पर फतवा देने वाले मौलानाओं को खालिद रशीद फरंगी महली ने आड़े हाथों लिया है। फरंगी महली का कहना है कि इस्लाम में सुनी सुनाई बातों पर फैसला लेना ही नाजायज है।
फरंगी महली ने कहा कि अभी भारत में कोई वैक्सीन नहीं आई है, ऐसे में सुनी सुनाई बातों पर जो मुस्लिम मौलाना बयान और फतवा दे रहे हैं, वो ठीक नहीं है। इससे गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि बगैर किसी तस्दीक के किसी चीज को हराम या हलाल कैसे कह सकते हैं. जो कोरोना वैक्सीन को हराम कह रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने किस डॉक्टर से जानकारी ली है।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों ने वैक्सीन पर रिसर्च किया है और सबसे बेहतरीन वैक्सीन ही इंसानों को दी जाएगी, इसलिए किसी भी तरह की अफवाह से बचना चाहिए। वैसे भी इस्लाम में कहा गया है कि जब खतरा हो तो जान बचाना सबसे बड़ा कर्तव्य है। फरंगी महली ने कहा कि मेरी गुजारिश है कि पोलियो वैक्सीन की तरह कोरोना वैक्सीन के लिए अफवाह न फैलाएं, बल्कि वैक्सीन का इंतजार करें और साथ ही डॉक्टर की सलाह लें।
अखबारों में मौलाना रशीद फिरंगी महली के हवाले से जो फतवे की खबरें छपी हैं उसकी मौलाना ने सख्त मजम्मत की है।