प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2026 में यूएई, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे पांच देशों का विस्तृत विदेश दौरा किया, जिसे भारत‑यूरोप और भारत‑गल्फ संबंधों को गहरा बनाने की एक रणनीतिक यात्रा माना जा रहा है।
इस दौरान प्रमुख रूप से व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और तकनीकी भागीदारी पर बड़े समझौतों और घोषणाओं पर फोकस किया गया।
दिल्ली लौटने के बाद कैबिनेट बैठक
पांच देशों की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे दिल्ली में केंद्रीय मंत्री परिषद (कैबिनेट) की समीक्षा बैठक बुलाई, जिसकी अध्यक्षता उन्होंने की।
समाचारों के अनुसार, यह बैठक लगभग 4 घंटे 30 मिनट तक चली और उच्चस्तरीय चर्चा के लिए आयोजित की गई, जिसमें विदेश दौरे के परिणामों के साथ‑साथ घरेलू मुद्दों की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य विषयों की समीक्षा
विदेश नीति और यात्रा परिणाम:
प्रधानमंत्री ने अपने पांच देशों की यात्रा के दौरान हुए द्विपक्षीय समझौतों, निवेश और ऊर्जा समझौतों की रूपरेखा पर कैबिनेट के साथ विस्तृत चर्चा की।
इसमें यूएई के साथ पेट्रोलियम रिजर्व और ऊर्जा सुरक्षा, नॉर्डिक देशों के साथ जलवायु और तकनीकी सहयोग, तथा इटली के साथ सांस्कृतिक‑आर्थिक जुड़ाव पर विशेष बल दिया गया।
आर्थिक स्थिति और नीतिगत कार्यान्वयन:
बैठक में मौजूदा आर्थिक हालात, मुद्रास्फीति, चालू खाता घाटा और निवेश वातावरण पर विस्तृत चर्चा हुई।
कैबिनेट को यह भी बताया गया कि विदेश दौरे से प्राप्त हुए निवेश और तकनीकी सहयोग के कार्यान्वयन के लिए किस स्तर की त्वरित कार्रवाई की जरूरत है।
सुरक्षा और वैश्विक घटनाक्रम:
ईरान‑इज़राइल तनाव जैसे क्षेत्रीय‑वैश्विक सुरक्षा खतरों पर भी चर्चा हुई, ताकि भारत की विदेश नीति और ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रह सके।
रक्षा‑सहयोग और डिफेंस इंडस्ट्री आउटसोर्सिंग पर भी निर्णय लिए जाने के संकेत मिले हैं।
बैठक का स्वरूप और समय
बैठक दिल्ली में सेवा तीर्थ (संभवतः प्रधानमंत्री कार्यालय/राजनैतिक मुख्यालय) में आयोजित हुई, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य केन्द्रीय मंत्री शामिल हुए।
समाचारों के अनुसार बैठक की अवधि लगभग 4 घंटे 30 मिनट तक रही, जो दर्शाती है कि इसमें नीतिगत निर्णयों की गहनता और विस्तृत चर्चा हुई।
राजनीतिक और सार्वजनिक संदेश
विदेश यात्रा के तुरंत बाद इतनी लंबी कैबिनेट बैठक बुलाने से सरकार की ओर से घरेलू‑वैश्विक नीतियों के बीच संतुलन और त्वरित आंतरिक समन्वय बनाने का संकेत दिया गया है।
इससे यह भी साफ होता है कि प्रधानमंत्री ने विदेश यात्रा के नतीजों के आधार पर आगामी आर्थिक और सुरक्षा नीतियों की रूपरेखा तय करने पर त्वरित ध्यान केंद्रित किया है।




