बाराबंकी ( ) धनतेरस आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि की जयंती को आज आयुर्वेद “स्वास्थ्य दिवस” के रूप में घंटाघर स्थित श्री मनोहर दास पदम कुमार जैन (वैद्यनाथ भवन) के प्रतिष्ठान पर हर्षोल्लास के साथ मनाई गई । धन्वंतरि हिंदू धर्म के एक देवता हैं, वे महान चिकित्सक थे जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं। इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुंद्र मंथन के समय हुआ था। समुद्र मंथन में त्रयोदशी के दिन धन्वंतरि जी अवतरित हुए थे जिस कारण धनतेरस को कार्तिक पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस कार्यक्रम की शुरुआत शरद कुमार जैन एवं डॉ एस विशाल वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई ।इस महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए सभी वैद ने अपनी उपस्थिति जूम मीटिंग के द्वारा दी।
रजाकपुर के वैद्य एस विशाल वर्मा ने इस महामारी के दौर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गुडुची, संजीवनी घनवटी, चिरयता, तुलसी, कुटकी आदि का प्रयोग बताया।
वैद्य अंबरीश वर्मा जी ने कहा कि इस तनाव भरी जिंदगी में अश्वगंधा के उपयोग एवं उसके महत्व पर चर्चा की।
डॉ यू डी मिश्रा ने आयुर्वेद व ज्योतिष को एक दूसरे का पूरक बताया ।
डॉ आशीष वर्मा ने आयुर्वेद उपचार के साथ-साथ योगा पंचकर्मा के प्रयोग पर बल दिया।
डॉ एनके चौधरी ने गिलोय स्वरस की उपयोगिता के बारे में बताया जो कि कोविड मे अधिक सहायक है, ऐसा आयुष विभाग ने भी बताया है।
डॉ अनूप जी ने नीम व पपीते का उपयोग डेंगू में गिरते प्लेटलेट्स को बढ़ाने के लिए सहायक बताया । आयुष विभाग ने भी माना कि आयुर्वेद उपचार की शक्ति से कोविड से ठीक हुए है लोग । आयुष क्वाद जो कि तुलसी, दालचीनी, सुंठी और काली मिर्च का मिश्रण है वे हमें इस कोविड से दूर रखने में कारगर रहा।
भगवान धन्वंतरि जयंती समारोह में मुख्य रूप से वैद्य एस विशाल वर्मा, वैद्य आशीष वर्मा, वैद्य अंबरीश वर्मा, डॉक्टर अनूप, डॉ आरके वर्मा, डॉ ए के विश्वकर्मा, डॉ वीरेंद्र श्रीवास्तव, सोनू, हिमांशु, देवांशी, वैभवी, शुभी, प्राशुक, नीलू आदि समारोह में जुड़े रहे ।
अंत में मनोहर दास पदम कुमार जैन के प्रबंधक शरद कुमार जैन ने मीटिंग में जुड़े हुए वैद्यगणो का आभार व्यक्त किया और भगवान धन्वंतरि जी से प्रार्थना किया कि जल्द से जल्द पूरा विश्व इस महामारी से मुक्त हो ।