लखनऊ, 22 जनवरी 2026 (शाम 2:19 बजे) – इस्लामिक इतिहास की सुनहरी शाम में, हजरतगंज स्थित ऐतिहासिक इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद की मस्जिद में शाबान महीने की 3 तारीख को यौम-ए- पैदाइश हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम पर एक भव्य महफिल-ए-नौचंदी जोहर का आयोजन किया गया। यह पवित्र मौका आंखों के नूर हजरत अली (अ.स.) और फातिमा ज़हरा (स.अ.) के जिगर के टुकड़े, खातमुन नबिय्यीन सैय्यदना रसूलullah (स.अ.व.) के नवासे, तीसरे इमाम हुसैन इब्न अली (अ.स.) की जन्म जयंती का है, जिनकी पैदाइश 3 शाबान को मदीना मुनव्वरा में हुई थी।इस्लामिक हिस्ट्री में इमाम हुसैन (अ.स.) सत्य, न्याय और हक की आवाज़ के प्रतीक हैं। कर्बला के मैदान में उन्होंने अत्याचार के खिलाफ़ अपना खून निछवारा, जो आज भी मुसलमानों के दिलों में जज़्बा-ए-शहादत जगाता है। उनकी शान में कुरआन की आयतें और अहले बैत के कलाम गूंजते हैं, जो हमें फितने के दौर में हिदायत का रास्ता दिखाते हैं। इस महफिल ने ठीक यही संदेश दिया – मोमिनीन की एकजुटता और इमाम की सुन्नत पर अमल।मस्जिद में नमाज़ अदा करने वाले मोमिनीन की ओर से आयोजित इस महफिल में कई शायरों ने अपना नाज़ुक कलाम पेश किया, जो इमाम हुसैन (अ.स.) की शान में रचा गया था। कलाम सुनकर वातावरण में आध्यात्मिक जोश उमड़ पड़ा। महफिल के اختتाम पर नज़रे इमाम हुसैन (अ.स.) का भी इंतज़ाम किया गया, जिसमें मोमिनीन ने इमाम की शफाअत की दुआएं मांगीं।यह आयोजन मोमिनीन के बीच इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति मुहब्बत को और मजबूत करने वाला साबित हुआ। आने वाले दिनों में ऐसी महफिलें जारी रहेंगी।




