वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर पूरे भारत में भव्य समारोह आयोजित किए गए हैं, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में किया.
इस अवसर पर डाक टिकट, स्मारक सिक्का और वंदे मातरम पर आधारित प्रदर्शनी जारी की गई, और ऑल इंडिया रेडियो व दूरदर्शन पर विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए गए.
वंदे मातरम की उत्पत्तिवंदे मातरम की रचना बंगाली लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी, जो उनके उपन्यास “आनंदमठ” में पहली बार प्रकाशित हुई.
यह गीत भारत की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का प्रतीक बन गय.
देशभक्ति से जुड़ाववंदे मातरम को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों भारतीयों ने अपनी देशभक्ति की भावना का प्रतीक माना। इसे ब्रिटिश राज के खिलाफ विद्रोह का नारा बनाया गया, और यह राष्ट्रीय गौरव व एकता की भावना को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाया.
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “मां भारती की आराधना” और देश की आत्मा का प्रतीक बताया.
वर्षगांठ की खासियत7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक एक साल तक राष्ट्रव्यापी उत्सव चलेगा.
देशभर के जिला और तहसील स्तर पर विशेष कार्यक्रम होंगे.
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर युवाओं को राष्ट्रसेवा का संदेश दिया,
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