नई दिल्ली कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष संरक्षक सोनिया गांधी आदि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की मणिपुर को लेकर मीटिंग हुई मीटिंग में मणिपुर में कानून-व्यवस्था और सरकार जैसी कोई चीज नहीं बची है। 150 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हैं। 10,000 से ज्यादा बच्चे राहत कैंप में रहने को मजबूर हैं। महिलाओं के साथ जिस तरह की हिंसा हो रही है, वह सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। लगभग तीन महीने से मणिपुर जल रहा है। लोगों के सिर छत छिन गई। आम लोगों को खाना और दवाइयां नहीं मिल रही हैं, बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है लेकिन प्रधानमंत्री समेत पूरी केंद्र सरकार मौन है।
देश की सुरक्षा केंद्र सरकार की सबसे पहली जिम्मेदारी है, लेकिन भाजपा सरकार यह जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम रही है। केंद्र सरकार के इस संवेदनहीन रवैये को देखते हुए श्री राहुल गांधी जी ने मणिपुर का दौरा किया और लोगों से शांति की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान खींचने की कोशिश की, लेकिन फिर भी वे मौन रहे। जिस दिन से संसद चल रही है, उसी दिन से पूरा विपक्ष मांग कर रहा है कि प्रधानमंत्री मणिपुर पर बात करें लेकिन न वे संसद में आ रहे हैं और न सरकार संसद चलने दे रही है।
एक तरफ मणिपुर के लाखों लोगों की जिंदगी पर संकट है तो दूसरी तरफ एक बॉर्डर स्टेट के साथ ऐसा खिलवाड़ हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर संकट है। INDIA गठबंधन के 25 सांसदों ने मणिपुर का दौरा किया और आज संसद में वहां के हालात के बारे में जानकारी दी।
प्रधानमंत्री जी, भागिए मत। अपनी जिम्मेदारी कबूल कीजिए। संसद में आइए, देश के सामने सच रखिए और मणिपुर में शांति बहाली के लिए प्रयास कीजिए।





