टोंक रियासत के चौथे नवाब सर मोहम्मद इब्राहिम अली खान जिनका शासन काल 1867 से 23 जून 1930 तक रहा ये कुछ चुनिंदा सरदारो में थे जिन्होंने तीन दफा देहली दरबार अटैंड किया था।
इनके ज़माने में सिरोंज परगने में बहुत से सुधार कार्य हुए थे और बहुत से नए काम और नए विभाग भी बनाए गए थे सन 1885 में नवाब इब्राहिम अली खान के नाम से सिरोंज टकसाल से सिक्के जारी हुए थे इन सिक्को के एक तरफ रईस टोंक इब्राहिम अली खान का नाम दर्ज था दूसरी तरफ अहद ए सल्तनत मुल्क ए मोअज़्ज़म इंग्लिस्तान ओ क़ैसर दर्ज था।
इस दौर में सिरोंज पर सहाबज़ादा निज़ाम अली खान जो की प्रथम नवाब अमीर अली खान के नवासे थे उन की हुकूमत थी बाद में ये ओहदा हाकिम से बदल कर नाज़िम कर दिया गया था। उन्होंने ने नवाब इब्राहिम अली खान के मश्विरे से कुछ बदलाव किए थे वो इस प्रकार हैं।
पहला काम पुलिस विभाग का आधुनिकीकरण करते हुए निम्नलिखित 13 थाने स्थापित किए।
1- कोतवाली सिरोंज
2- देवपुर
3- आनंदपुर
4- लटेरी
5- अलीगढ़
6- टोंकरा
7- उनारसी कलां
8- उनारसी ताल
9- अमीरगढ़
10- दीपना खेड़ा
11- झंडवा
12- महोटी
13- भगवंत पुर
इनके अलाव सात चौकीयां अलग थीं।
कुछ साल बाद 13 थानो के बजाए निम्नलिखित 9 थाने ही कायम रखे गए बाकी बंद कर दिये गए
कोतवाली सिरोंज, लटेरी, टोंकरा, ककराज कोटरा, उनारसी ताल, बामौरी शाला, झंडवा, भगवंतपुर, उनारसी कलां और सात चौकीयां।
हर पुलिस स्टेशन में एक थानेदार, एक जमादार (हैड) एक हवलदार, और पांच कांस्टेबल रखे गए थे, इस इंतेज़ाम से परगना सिरोंज का विशाल भू भाग सुरक्षित हो गया। इस बदलाव से क्राइम रेट में बहुत कंट्रोल हो गया इस समय तक जो परगने का आमिल होता था वही पुलिस डिपार्टमेंट का उच्च अधिकारी होता था।
सिविल अस्पताल (दारुल शिफ़ा) की स्थापना सिहोर ऐजेंसी के सिविल सर्जन की निगरानी मे हुआ।
मुंसिपल कमेटी (नगर पालिका) की स्थापना हुई जिससे रास्तों की साफ सफाई और रात में सड़को पर रौशनी का नुमाया काम हो सका।
राजस्व विभाग की आमदनी से अली गंज के मशहूर मेले की शुरूआत हुई जो पंद्रह दिन चलता था आस पास के गांवो से बहुत लोग मेले में तफरीह के लिए आते थे मेले की सुरक्षा का ज़िम्मा पुलिस विभाग के रिसालदार (घुड़ सवार सैना नायक) और जागीरदारन के हवाले होता था।




