लखनऊ, 13 मई 2025: ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल, जिसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है, आज लखनऊ में पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व भगवान हनुमान को समर्पित है और लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण है, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय ने मिलकर भंडारों का आयोजन किया। शहर की गलियों, चौराहों और मंदिरों के आसपास आयोजित इन भंडारों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और मुसाफिरों को पूड़ी-आलू, छोला, भटूरा, कढ़ी-चावल, छोले-चावल, ठंडा पानी और शरबत जैसी चीजें वितरित की गईं।
बड़ा मंगल: क्यों और कब से?
बड़ा मंगल ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाता है, जो हनुमान जी की भक्ति और सामाजिक सेवा का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। इसके अलावा, महाभारत काल में हनुमान जी ने वृद्ध वानर के रूप में भीम के घमंड को तोड़ा था, जिसके कारण इसे बुढ़वा मंगल भी कहते हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह परंपरा लगभग 400 साल पहले लखनऊ में शुरू हुई, जब अवध के नवाब शुजाउद्दौला की बेगम आलिया बेगम या नवाब वाजिद अली शाह की बेगम ने अपने बेटे के स्वस्थ होने पर अलीगंज के हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और भंडारे की शुरुआत की।
आयोजन और हिंदू-मुस्लिम एकता
लखनऊ के अलीगंज, हनुमान सेतु, अमीनाबाद और अन्य मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ और विशेष पूजा-अर्चना हुई। शहर भर में 224 से अधिक भंडारा आयोजकों ने नगर निगम में पंजीकरण करवाया, और नगर निगम ने पेयजल, सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की। इन भंडारों में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग कंधे से कंधा मिलाकर सेवा में जुटे, जो लखनऊ की सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है। यह परंपरा नवाबी दौर से चली आ रही है, जब आलिया बेगम ने मंदिर निर्माण और भंडारे शुरू किए, जिसके गुंबद पर चांद का निशान आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता की कहानी बयां करता है।
मकसद और महत्व
बड़ा मंगल का मुख्य उद्देश्य हनुमान जी की भक्ति, संकट निवारण और सामाजिक सेवा है। यह पर्व भक्तों को सुख-समृद्धि, बुद्धि और बल प्राप्त करने का अवसर देता है। भंडारों के माध्यम से कोई भी भूखा न रहे, यह सुनिश्चित किया जाता है। यह पर्व सामाजिक समरसता और परोपकार को बढ़ावा देता है।
क्या पूरे भारत में मनाया जाता है?
बड़ा मंगल मुख्य रूप से लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों (जैसे कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज) में ही बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। हालांकि, लखनऊ की प्रसिद्धि के कारण कुछ अन्य क्षेत्रों में भी यह प्रचलन बढ़ रहा है, लेकिन यह पूरे भारत में व्यापक नहीं है।
आज का उत्साह
आज 13 मई 2025 को पहले बड़े मंगल पर लखनऊ में भक्ति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। भक्तों ने मंदिरों में सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी के लड्डू चढ़ाए, जबकि भंडारों में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस पर्व की शुभकामनाएं साझा कीं, जिसमें हनुमान जी की आराधना और हिंदू-मुस्लिम एकता की भावना को विशेष रूप से उजागर किया गया।
निष्कर्ष
बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि लखनऊ की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। 400 साल पुरानी इस परंपरा ने हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत किया है, और आज के आयोजन ने एक बार फिर इस तहजीब को जीवंत कर दिया। सभी भक्तों को पहले बड़े मंगल की हार्दिक शुभकामनाएं!
हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक: लखनऊ में पहले बड़े मंगल का भव्य आयोजन



