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स्वर्गीय लालजी टंडन: लखनऊ के ‘बाबूजी’, जिन्होंने सेवा को बनाया जीवन का मंत्र: शाबू ज़ैदी

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आज, भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई के प्रिय शिष्य और लखनऊ के ‘बाबूजी’ कहे जाने वाले स्वर्गीय लालजी टंडन की जयंती है। यह दिन हमें उस शख्सियत को याद करने का अवसर देता है, जिन्होंने अपनी सादगी, समर्पण और सेवा भाव से न केवल लखनऊ का दिल जीता, बल्कि देश भर में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
लालजी टंडन का राजनीतिक सफर एक साधारण शुरुआत से हुआ। चौक वार्ड के सभासद के रूप में अपने करियर की नींव रखने वाले लालजी ने धीरे-धीरे अपनी मेहनत और जनसेवा के दम पर भारतीय जनता पार्टी में अपनी विशेष पहचान बनाई। एमएलसी से लेकर उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री तक के उनके सफर में लखनऊ के विकास के लिए किए गए कार्य आज भी लोगों के जेहन में बसे हैं। उनका नारा, “मेरा नाम है लालजी टंडन, मैं लखनऊ को बना दूंगा लंदन,” सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उनके संकल्प और दूरदृष्टि का प्रतीक था।
लालजी टंडन की सबसे बड़ी खासियत थी उनकी सर्वसुलभता। उनका आवास और कार्यालय हर धर्म, हर वर्ग के लोगों के लिए हमेशा खुला रहता था। लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उनके पास आते और ‘बाबूजी’ बिना किसी भेदभाव के हर संभव मदद करते। उनकी यह दरियादिली और मोहब्बत ही थी, जिसने उन्हें लखनऊवासियों के दिलों में ‘बाबूजी’ के रूप में अमर कर दिया। चाहे वह सड़कों का निर्माण हो, शहर की साफ-सफाई हो या जनसुविधाओं का विस्तार, लालजी ने लखनऊ को एक नई पहचान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
लखनऊ से सांसद के रूप में भी उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी सादगी और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें केंद्र सरकार की नजरों में भी विशेष स्थान दिलाया, और उन्हें मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने अपनी वही सादगी और सेवा भाव बनाए रखा, जो उनकी पहचान थी।
लालजी टंडन सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने कार्यों से यह सिखाया कि सच्ची नेतृत्व का मतलब है जनता के बीच रहना, उनकी तकलीफों को समझना और उन्हें दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करना। उनकी जयंती पर हम उनके आदर्शों को याद करते हैं और संकल्प लेते हैं कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर समाज और देश के लिए कुछ बेहतर करेंगे।
‘बाबूजी’ लालजी टंडन को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। आप भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपके कार्य और आपकी यादें हमेशा लखनऊ के कण-कण में जीवित रहेंगी।
लेखक
7617032786

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