आज सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति और राज्यपालों के अधिकारों पर सुनवाई होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि क्या राज्यपालों और राष्ट्रपति को राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की जा सकती है। इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट को एक संदर्भ भेजा है, जिसमें 14 संवैधानिक प्रश्न पूछे गए हैं।
इन प्रश्नों में शामिल हैं ¹:
– *राज्यपाल के अधिकार*: क्या राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे हैं? क्या उनका विवेकाधिकार सीमित है?
– *न्यायिक समीक्षा*: क्या राज्यपाल के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है? क्या न्यायालय समय-सीमा निर्धारित कर सकता है?
– *राष्ट्रपति के अधिकार*: क्या राष्ट्रपति का विवेकाधिकार न्यायोचित है? क्या राष्ट्रपति के निर्णयों पर समय-सीमा लगाई जा सकती है?
– *संविधान की व्याख्या*: क्या संविधान की व्याख्या से जुड़े मामलों पर पांच सदस्यीय पीठ जरूरी है?
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी, जिसमें चीफ जस्टिस बीआर गवई के अलावा जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस अतुल एस चंदुरकर और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। यह मामला न केवल राज्यपालों और राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिकाओं को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि संघीय ढांचे में शक्ति संतुलन की भी समीक्षा करेगा ¹ ²।





