नई दिल्ली, 8 नवंबर 2025: देश में कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार वृद्धि को देखते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजरिया की खंडपीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को तलब किया और सार्वजनिक स्थानों जैसे स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सरकारी संस्थानों से आवारा कुत्तों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इन कुत्तों को एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) रूल्स, 2023 के तहत स्टेरलाइजेशन (नपुंसकलन) और वैक्सीनेशन के बाद नामित शेल्टर हाउस में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, इन संस्थानों को ठीक से फेंसिंग (बाड़ लगाने) का आदेश दिया गया ताकि भविष्य में कुत्ते दोबारा प्रवेश न कर सकें।कोर्ट ने आवारा पशुओं की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर हल करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और एक्सप्रेस-वे से भी आवारा कुत्तों और मवेशियों को हटाने का निर्देश दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को निर्देश दिए गए हैं कि हाईवे पर 24 घंटे पेट्रोलिंग की जाए और हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाएं, ताकि लोग तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें। मुख्य सचिवों को 8 हफ्तों के भीतर इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है, और कोर्ट ने चेतावनी दी कि गैर-अनुपालन पर संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।यह मामला जुलाई 2025 में कोर्ट के स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) से शुरू हुआ था, जब मीडिया रिपोर्ट्स में दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में बच्चों सहित लोगों पर कुत्तों के हमलों और रेबीज से मौतों की बढ़ती संख्या का जिक्र था। अगस्त में कोर्ट ने सभी राज्यों को एबीसी रूल्स के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन कई राज्यों की लापरवाही पर 27 अक्टूबर को मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया गया था। आज की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अधिकांश राज्यों ने अनुपालन हलफनामे जमा कर दिए हैं, लेकिन कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया।देशभर से समर्थन की बाढ़, डॉग लवर्स का सीमित विरोध: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का देश के विशाल वर्ग ने खुलकर स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर #SupportSCStrayDogsOrder जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लाखों लोग इसे “सराहनीय कदम” बता रहे हैं। मुंबई के एक निवासी ने कहा, “कुत्तों के काटने से रोज सैकड़ों बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। यह आदेश देर से आया, लेकिन सही दिशा में है।” दिल्ली-एनसीआर में रेबीज से हुई मौतों के आंकड़े देखते हुए कई एनजीओ और अभिभावक संगठनों ने इसे “जन स्वास्थ्य की रक्षा” करार दिया। एक सर्वे के मुताबिक, 70% से अधिक लोग इस निर्देश के पक्ष में हैं, जो बताता है कि सार्वजनिक सुरक्षा अब प्राथमिकता बन चुकी है।हालांकि, कुछ पशु प्रेमी संगठनों ने विरोध जताया है। उन्होंने दावा किया कि यह निर्देश पशु क्रूरता अधिनियम का उल्लंघन करता है और आवारा कुत्तों को मारने का बहाना बन सकता है। दिल्ली में चंद डॉग लवर्स ने सड़कों पर प्रदर्शन भी किया, लेकिन यह विरोध सीमित रहा। एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई) को मामले में शामिल किया गया है, जो स्टेरलाइजेशन पर जोर दे रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुत्तों का कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि उन्हें सुरक्षित शेल्टर में रखा जाएगा।यह फैसला न केवल कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करेगा, बल्कि रेबीज जैसी घातक बीमारियों पर अंकुश लगाने में भी मददगार साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी राज्य अनुपालन करें, तो अगले कुछ महीनों में स्थिति में सुधार दिखेगा। मुख्य सचिवों की अगली रिपोर्ट पर कोर्ट की नजर रहेगी, जो इस मुद्दे को राष्ट्रीय नीति का रूप दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा निर्देश: आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाकर शेल्टर में पहुंचाने का आदेश, मुख्य सचिवों को 8 हफ्ते में रिपोर्ट जमा करने को कहा




