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सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष आतंकवाद को खत्म करने के लिए एक जुट - The Revolution News
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सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष आतंकवाद को खत्म करने के लिए एक जुट

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भारतीय सेना द्वारा ऑक्युपाए कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के बाद 8 मई 2025 को केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के परिणामों पर चर्चा हुई। बैठक में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विचार-विमर्श और निर्णय लिए गए:
चर्चा के प्रमुख बिंदु:
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता:
भारतीय सेना द्वारा ऑक्युपाए कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने की कार्रवाई की सराहना की गई। सभी दलों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना।
ऑपरेशन में आतंकी संगठन ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसे पाकिस्तान समर्थित माना जाता है।
पाकिस्तान की भूमिका:
बैठक में पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया गया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि पहलगाम हमले में पाकिस्तान से संबंध उजागर हुए हैं।
कुछ नेताओं, जैसे असदुद्दीन ओवैसी, ने सुझाव दिया कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई तेज करनी चाहिए, जैसे TRF को आतंकी संगठन घोषित करने के लिए अमेरिका से अनुरोध करना और FATF में पाकिस्तान को ग्रे-लिस्ट करने का प्रयास करना।
सुरक्षा में चूक:
केंद्र सरकार ने माना कि पहलगाम हमले में सुरक्षा चूक हुई, खासकर बेसरन वैली को बिना पर्याप्त सुरक्षा के पर्यटकों के लिए खोलने के निर्णय में। इसकी जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने पर चर्चा हुई।
राष्ट्रीय एकजुटता:
सभी दलों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई और सरकार को पूर्ण समर्थन देने का वादा किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष सरकार के साथ है, हालांकि कुछ गोपनीय जानकारी साझा नहीं की गई।
बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने ऑपरेशन सिंदूर की सटीकता और साहस की प्रशंसा की।
पीड़ितों के लिए मुआवजा:
असदुद्दीन ओवैसी ने सुझाव दिया कि पहलगाम और पुंछ में मारे गए लोगों को आतंकवाद पीड़ित घोषित कर मुआवजा और आवास प्रदान किया जाए।
आगे की रणनीति:
बैठक में भविष्य की रणनीतियों पर विचार हुआ, जिसमें सीमा पर सतर्कता बढ़ाना, मॉक ड्रिल के जरिए आपातकालीन तैयारियों को परखना, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग बढ़ाना शामिल था।
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में आवश्यक सुविधाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयासों पर भी जोर दिया गया।
प्रमुख निर्णय:
सुरक्षा व्यवस्था में सुधार:
सरकार ने सुरक्षा इंतजामों में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने का फैसला किया, खासकर पर्यटन स्थलों पर। बेसरन वैली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय दबाव:
पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक कार्रवाई को और तेज करने का निर्णय लिया गया, जिसमें वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को उठाना शामिल है।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई:
सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ और सख्त कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई, जिसमें सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने की नीति को जारी रखना शामिल है।
सोशल मीडिया पर निगरानी:
पहलगाम हमले के बाद सोशल मीडिया पर देश विरोधी पोस्ट और अफवाहों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का निर्णय लिया गया। कई सोशल मीडिया हैंडल पहले ही प्रतिबंधित किए जा चुके हैं।
मॉक ड्रिल और तैयारियां:
7 मई को देश भर में 259 स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी, और ऐसी तैयारियों को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
निष्कर्ष:
सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन किया। ऑपरेशन सिंदूर को एक निर्णायक कदम माना गया, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीतियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। हालांकि, कुछ नेताओं ने सुरक्षा चूक पर सवाल उठाए और सरकार से और पारदर्शिता की मांग की।
नोट: उपरोक्त जानकारी समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आधारित है। कुछ बिंदु संवेदनशील होने के कारण गोपनीय हो सकते हैं, जैसा कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने उल्लेख किया।

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