समाजवादी पार्टी के सांसदों ने INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं के साथ मिलकर 22 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में संसद के मकर द्वार पर बिहार में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD, TMC, और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल थे। प्रदर्शनकारी सांसदों ने SIR को “अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक” करार देते हुए इसे “वोट चोरी” और लोकतंत्र पर हमला बताया। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया आर्थिक रूप से कमजोर, प्रवासी, और हाशिए पर पड़े समुदायों, जैसे दलित, गरीब, और मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके मताधिकार को छीन सकती है।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई है, जो संदेहास्पद है और मतदाता सूची से लाखों नाम हटाने की साजिश हो सकती है। उन्होंने इसे संविधान के मूल ढांचे और स्वतंत्र चुनाव के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “SIR: भारतीय अधिकारों की चोरी” जैसे नारे लगाए और तख्तियां प्रदर्शित कीं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे “लोकतंत्र का कत्ल” करार दिया। साथ ही, विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा और न्यायिक जांच की मांग की, लेकिन सरकार ने चर्चा की अनुमति नहीं दी।
दूसरी ओर, कुछ नेताओं, जैसे लोक जनशक्ति पार्टी के अरुण भारती, ने तर्क दिया कि SIR पहले भी 1965, 1983, 1993, 2005 जैसे वर्षों में हुआ था, और इसे लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी बताया। सुप्रीम कोर्ट ने भी 10 जुलाई 2025 को SIR की वैधता पर सुनवाई की, जहां इसकी टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए, लेकिन इसे तत्काल रोकने से इनकार कर दिया और आधार कार्ड व राशन कार्ड को पहचान के लिए शामिल करने का निर्देश दिया।[]()



