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शिया मुसलमान नवीं (9 रबीअव्वल) क्यों मनाता है:एस,एन लाल

लेखक एस.एन.लाल
ये कोई अक़ीदा नहीं इतिहास की बात है..जिसको हर मुसलमान को जानना चाहिए, क्योंकि आखिर मर कर तो ऊपर ही जायेगा…वहीं जन्नत व दोज़ख़ का फैसला होगा…और रसूल स.व.अ. की इस हदीस के हर मुसलमान गवाह है कि ‘‘जवानों की जन्नत के सरदार इमाम हसन अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. और औरतों की जन्नत की सरदार फात्मा ज़हरा अ.स. हैं।’’
ये नवी ‘ईद-ए-ज़हरा’ कहलाती है यानि रसूल स.व.अ. की बेटी से मन्सूब है, यानि करबला के सानिहे के 3 से 4 साल बाद फात्मा ज़हरा के घर में खुशी आयी थी। हुआ यू था जब ज़ैलनुलआबिदीन अ.स. नाश्ता कर रहे थे, उसी वक़्त मुख्तार इब्न उबैदुल्लाह अल-थकाफी का कासिद आया, जो एक हाथ पोटली और एक हाथ में ख़त लिये हुए था। जब ख़त पढ़ा गया, तो उसमें लिखा था कि करबला शहीदों के सारे क़ातिलों से कस्सास ले लिया गया है। और उस पोटली में मुख्तार ने उमर इब्न साद इब्न अबी वक्कास (कर्बला में यजीद की सेना के कमांडर-इन-चीफ) और उबैदुल्लाह इब्न जियाद (कुफा में यजीद के गवर्नर) का सिर काटा था औैर उनके सिर मदीना में इमाम अली इब्न अल-हुसैन अल-जैनुल आबिदीन (अ) के पास भेजे थे।
एस.एन.लाल
ये दोनों सिर 9 रबी अव्वल को इमाम अली इब्न अल-हुसैन अल-जैनुल आबिदीन (अ. अल्लाह (एसडब्ल्यूटी) के सामने रखे गये थे । इनके सिर देखकर इमाम ने कहा मुझे आज तक परवरदिगार ने जिंदा रखा ताकि मैं उन क़ातिलों के सिर देख सकूं जिन्होंने मेरे बाबा को मार डाला। इमाम अली इब्न अल-हुसैन अल-जैनुल आबिदीन (अ) ने तब अपने परिवार के लोगोें को शोक के कपड़े उतारने, खुद को सजाने और खुशी के साथ यह दिन मनाने को कहा।
एस.एन.लाल
दूसी खुशी इसी दिन है..इमाम मेंहदी अ.स. के इमाम बनने की, जिनको परवरदिगार ने परर्दे ग़ैबत में रख रखा है। इमाम मेंहदी के ज़हूर के बारे में मुसलमानांे के हर फिरक़े की किताबों में मिलेगा, इसलिए इस पर ज़्याद कुछ नहीं कहना, अपनी किताबों में ही पढ़ सकते हैं।
वही मुसलमान जब ईदुल मिलादुन नबी नहीं मनाता है…क्योंकि जो नबी की पैदाईश नहीं मना सकता, वह उनकी आल की खुशियां नवी को कैसे मनायेंगा। मुसलमान कभी ये नही सोचता कि नमाज़-रोज़ा जो कर रहा है, ये रसूल अ.स. की आल का ही सदक़ा है। उन्होंने ही अल्लारह के दीन की हिफाज़त नाम-नेहाद मुसलमानों से की है।
अफसोस आईटी की हदीसे इतनी आम है, और जाहिल मुसलमान उसी को सही मानता है। खुद तो अरबी क्या उर्दू से भी दूर है, अपना मज़हब पढ़ तो सकता नहीं…। और जो लोग भी आज के दिन गाली गलौज करते है…वह भी मुसलमान नहीं…! क्योंकि वह भी इस्लाम के खिलाफ बात करते हैं।

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