कोरोना संक्रमण की रफ्तार को काबू करने के लिए सरकार ने टीकाकरण पर विशेष जोर दिया है। 1 मई से देश में 18 साल और उससे अधिक आयु के लोगों को टीके दिए जाने की शुरुआत हो गई है। कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए इसी तरीके को जानकार सबसे प्रभावी मानते हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही देश के सभी युवाओं को वायरस से सुरक्षा देना वाला यह टीका मिल जाएगा।
एक ओर जहां टीकाकरण को बेहद जरूरी और फायदेमंद माना जा रहा है, वहीं इसके एक पहलू को लेकर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य संस्थाओं को सचेत भी किया है। डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीनेशन के कारण आने वाले महीनों में देश को एक दूसरी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
डॉक्टरों को डर है कि महामारी और टीकाकरण के कारण आने वाले महीनों में भारत में युवा रक्तदाताओं की भारी कमी आ सकती है। खून की बढ़ती मांग और रक्त दाताओं की कमी के कारण ब्लड बैंक पहले से ही रक्त की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय में देश में कई मिलियन यूनिट रक्त की कमी है जो आने वाले दिनों में और ज्यादा होने वाली है।
एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट में कार्डियोवस्कुलर थोरैसिक और ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ रघुवेंद्र चिकतूर कहते हैं कि ब्लड बैंकों में रक्त को अनिश्चित काल तक संग्रहित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में भविष्य में आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए रक्तदान शिविरों का संचालन कर लोगों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करना होगा। कोरोना महामारी एक दिन खत्म हो जाएगी लेकिन उसके बाद ब्लड बैंकों में रक्त की कमी किसी विकट समस्या का कारण न बने।