विनायक दामोदर सावरकर की जयंती, 28 मई 2025, को भारत के कई राज्यों में उत्साह के साथ मनाई गई। विभिन्न स्रोतों के आधार पर, निम्नलिखित राज्यों और क्षेत्रों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, साथ ही कुछ प्रमुख नेताओं के बयान भी सामने आए।
राज्यों में आयोजित कार्यक्रम
महाराष्ट्र:
मुंबई और नासिक: सावरकर की जन्मभूमि होने के नाते, महाराष्ट्र में विशेष रूप से उत्साह देखा गया। मुंबई में हिंदू महासभा और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों ने संगोष्ठियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित कीं। नासिक के भगूर गाँव में, जहाँ सावरकर का जन्म हुआ, स्थानीय लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके जीवन पर आधारित वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं।
पुणे: फर्ग्यूसन कॉलेज, जहाँ सावरकर ने पढ़ाई की, में उनके योगदान पर आधारित एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
मध्य प्रदेश:
इंदौर: मध्य प्रदेश सरकार ने सावरकर की जयंती पर बड़े आयोजन किए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में सावरकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके साहित्य को स्कूलों-कॉलेजों में शामिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उनके जीवन पर आधारित फिल्म को शैक्षणिक संस्थानों में प्रदर्शित करने की योजना भी घोषित की गई।
भोपाल: सावरकर के विचारों पर आधारित सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें युवाओं को उनकी देशभक्ति से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया।
दिल्ली:
दिल्ली में नए संसद भवन के उद्घाटन (28 मई 2023 को सावरकर जयंती के दिन) की याद में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रवादी संगठनों ने सावरकर की विचारधारा पर चर्चा के लिए सभाएँ कीं।
सावरकर के सम्मान में संसद परिसर में उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
अंडमान और निकोबार:
पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास और सेलुलर जेल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। सेलुलर जेल, जहाँ सावरकर को दोहरे आजीवन कारावास की सजा काटनी पड़ी, में उनकी स्मृति में एक प्रदर्शनी और स्मृति सभा का आयोजन हुआ।
अन्य राज्य:
गुजरात, कर्नाटक, और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी हिंदू महासभा और अन्य संगठनों ने सावरकर जयंती पर छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें उनके लेखन और हिंदुत्व विचारधारा पर चर्चाएँ हुईं। इन राज्यों में माल्यार्पण, रैलियाँ और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम देखे गए।
रंगारंग कार्यक्रम
सांस्कृतिक कार्यक्रम: कई स्थानों पर सावरकर के जीवन पर आधारित नाटक, कविता पाठ, और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई। खासकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में सावरकर के गीत “अनादि में, अनंत में” पर आधारित प्रदर्शन हुए।
श्रद्धांजलि सभाएँ: सावरकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और उनके विचारों पर व्याख्यान आयोजित किए गए।
वाद-विवाद और सेमिनार: स्कूलों और कॉलेजों में सावरकर के हिंदुत्व दर्शन, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका, और सामाजिक सुधारों पर चर्चाएँ हुईं।
दान-पुण्य: हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने कुछ स्थानों पर गरीबों को भोजन और कपड़े वितरित किए।
प्रदर्शनियाँ: सावरकर के लेखन, विशेष रूप से उनकी पुस्तक “हिंदुत्व: हू इज हिंदू?” और “1857 का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम” पर आधारित प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं।
नेताओं के बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:
पीएम मोदी ने सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “वीर सावरकर की जयंती पर, हम उनके साहस और देशभक्ति को याद करते हैं। उनकी बहादुरी और विचारधारा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।” उन्होंने विशेष रूप से सावरकर के स्वतंत्रता संग्राम और हिंदुत्व के योगदान को रेखांकित किया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव:
इंदौर में एक कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव ने कहा, “सावरकर ने अंग्रेजों की पोल खोली और कभी ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाना बंद नहीं किया। अगर उनके विचारों को पूरी तरह अपनाया जाता, तो देश की स्थिति आज और बेहतर होती।” उन्होंने सावरकर के साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने और उनकी जयंती-पुण्यतिथि पर बड़े आयोजन करने की घोषणा की।
महाराष्ट्र के नेता:
महाराष्ट्र के कुछ नेताओं, विशेष रूप से भाजपा और शिवसेना से जुड़े नेताओं ने सावरकर को “हिंदुत्व के प्रणेता” और “स्वतंत्रता संग्राम के नायक” के रूप में याद किया। उद्धव ठाकरे ने सावरकर और नेहरू पर राजनीति बंद करने की बात कही, लेकिन उनके योगदान को सम्मान दिया।
विपक्षी नेताओं:
कुछ विपक्षी नेताओं, जैसे राहुल गांधी, के पुराने बयानों पर विवाद रहा। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में राहुल गांधी के सावरकर पर टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताया था, जिसका जिक्र इस मौके पर भी हुआ।
विशेष टिप्पणी
सावरकर की जयंती पर उनके विवादास्पद व्यक्तित्व को लेकर भी चर्चाएँ हुईं। जहाँ एक ओर राष्ट्रवादी संगठन उन्हें देशभक्त और हिंदुत्व के प्रणेता के रूप में देखते हैं, वहीं कुछ समूह उनकी विचारधारा और भारत छोड़ो आंदोलन के विरोध को लेकर आलोचना करते हैं।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सावरकर के विचारों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की माँग को लेकर चर्चाएँ तेज हुईं।
यदि आप किसी विशेष राज्य, नेता, या कार्यक्रम के बारे में और विस्तार से जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएँ, मैं और जानकारी जुटा सकता हूँ।
विनायक दामोदर सावरकर की जयंती देश के कई राज्यों में हर्षोल्लाह से मनाई गई



