Home / उत्तर प्रदेश / वक्फ की संपत्तियां दरगाह और इमामबाड़ा इत्यादि मुसलमानों का जिस्म है और मुसलमान उसकी रूह है :सैयद बाबर अशरफ

वक्फ की संपत्तियां दरगाह और इमामबाड़ा इत्यादि मुसलमानों का जिस्म है और मुसलमान उसकी रूह है :सैयद बाबर अशरफ

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लखनऊ ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन की एक बैठक हुई जिसमें कहा गया  वक्फ मुस्लिम समुदाय के सांस्कृतिक, सामाजिक और रूहानियत को मजबूत बनाने का सबसे बड़ा मरकज है, जो खासकर इसके कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए दी गई संपत्ति है, जो मुसलमानों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उनकी खुद की पहचान

मुसलमानों की आस्था के अनुसार वक्फ करना अल्लाह की राह में एक ऐसा नेक अमल है, जो वक्फ्दाता की जिंदगी में उसके लिए रहमत और उसके मरने के बाद उसकी वक्फ की गई संपत्ति पर उसके इच्छानुसार हो रहे नेक कार्यों के लिए उसे मिलने वाला सवाब है. लेकिन एनडीए सरकार द्वारा प्रस्तावित नया वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024, में मुसलमानों की जगह नॉन मुस्लिमों को बैठाया जाना, वक्फ बोर्ड को निष्क्रिय करने जैसे बेबुनियाद संशोधन मुस्लिमों की आत्मा को झकझोरने का काम कर रही है, भारत में समान लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ जीने की उनकी आकांक्षाओं पर गहरा आघात है
ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन, जो धार्मिक, सामाजिक और अध्यात्मिक कार्यों के लिए समर्पित एक संगठन है, ऐसी ही सोच और फ़िक्र रखने वाले लोगों ने एक साथ मिलकर ‘वक्फ-विरासत बचाओ तहरीक’ की शुरुआत की है ताकि मुसलमानों को सरकार के इस गलत कदम के खिलाफ संगठित किया जा सके और सरकार से शांतिपूर्ण तरीके से अनुरोध किया जा सके कि वह इस विधेयक पर विचार विमर्श कर रद्द करे और वक्फ बोर्ड को मजबूत बनाने का काम करे.
ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के महासचिव सैयद बाबर अशरफ ने कहा “आसान लफ़्ज़ों में बयाँ करें तो वक्फ की संपत्तियां (दरगाह और इमामबाड़ा इत्यादि…) मुसलमानों का जिस्म है और मुसलमान उसकी रूह है और सरकार इस प्रस्तावित वक्फ संशोधन-2024 मुसलमानों के जिस्म से उसकी रूह को अलग करने के अथक प्रयास में है. जबकि सरकार ये समझे बिना कि वक्फ मुस्लिमों की आस्था के मुताबिक उनकी रूहानियत से जुड़ा है, ना कि सिर्फ एक संपत्ति की हैसियत से है.”
उन्होंने आगे कहा, इतिहास के पन्नों को पलटे तो वक्फ के इदारों से ही ब्रिटिश हुक्मरानों की जुल्म और ज्यादती की मुखालिफत एक बुलंद आवाज़ बनकर पूरे देश में गूंजी और प्यारे मुल्क हिंदुस्तान को आज़ाद कराया गया. दुनियाभर में वक्फ के मकसद को सराहा गया है और इसके फलाही मकसद को देखते हुए तमाम संस्थानों ने इसको बढ़ावा दिया.
ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद अयूब अशरफ ने कहा, भारत में वक्फ तीसरी सबसे बड़ी संपत्ति है. अगस्त 2024 तक, देश भर में 8.7 लाख वक्फ संपत्तियाँ हैं, जो 9.4 लाख एकड़ भूमि पर फैली हुई हैं. इन सभी संपत्तियों का भले ही ठीक से प्रबंधन नहीं किया गया हो, बावजूद इसके यह लाखों गरीब मुस्लिम भारतीयों, बच्चों और महिलाओं के लिए मददगार है. और आपदा के समय यही उनके लिए रोशनी की एक किरण है. वक्फ कई परोपकारी संगठनों, अनाथालयों, मस्जिदों, कब्रिस्तानों, दरगाहों, इमामबाड़ों, कर्बला, तकिया और शैक्षिक संस्थानों आदि का संचालन करता है.

बी. डी. नकवी (पूर्व जिला न्यायधीश) ने कहा, वास्तव में वक्फ सदियों से मुसलमानों द्वारा किया जाने वाला एक यूनिक वेलफेयर सिस्टम है. जिसके तहत इंसानियत के अलमबरदार अपनी मर्जी से अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा समुदाय के कल्याण के लिए वक्फ (दान) कर देता है. कई मामलों में, पूरी पारिवारिक संपत्ति को भी वक्फ के रूप में दान कर दिया गया और यही कारण है कि भारत में वक्फ संपत्तियां बहुत अधिक मौजूद हैं.

मौलाना तौकीर रज़ा बरेलवी ने कहा एक मुसलमान जब समाज के वांछितों, अनाथों और इंसानियत के लिए अपनी संपत्ति दान करता है तो उसके दिल को बेहद सुकून मिलता है, मगर दुख की बात है कि सरकार मुस्लिमों को इस दिली सुकून से वंचित करने के इरादे में है. फिर भले ही सरकार या उन्हें इस विधेयक के लिए राय देने वाले सरकार को वक्फ के इस नेक मकसद से गुमराह कर रहे हैं.
इस अहम बैठक के माध्यम से शाह अब्दुल रहमान (सज्जादा नशीन मैनपुरी), शाह मोहम्मद अली आरिफ (सज्जादा रुदौली शरीफ), ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के यूथ अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अहमद, सैयद याकूब अशरफ, राशिद मिनाई (सज्जादा नशीन दरगाह शाह मीना), महबूब आलम सिद्दीकी, मौलाना मोहम्मद सुहेल अशरफी, सैयद मोहम्मद फैजी जाफरी (खानकाह मदारिया मकनपुर शरीफ), औकाफ अली मैनपुरी, मोहम्मद वकार इलाही, मौलाना मोहम्मद असलम अशरफी, एडवोकेट औसाफ अहमद खान, डॉ. शहाब अशरफ, एस बदरुदौजा नकवी, हाईकोर्ट वकील अमानुर्रह्मान, रिसालत हुसैन नईमी, वहीदुल हसन सिद्दीकी, सैयद आले मोहम्मद (खानकाह खदरा बड़ी सरकार), सैयद फाजिल मसूदी (खानकाह बाँदा) और इमरान रज़ा आदि ने बुधवार को सरकार से कहा कि वक्फ पूरी तरह से निजी संपत्ति है, जिसमें सरकार की भूमिका वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जों से मुक्त कराकर वक्फ के मकसद को बचाना है.
सभी शामिल हुए जिम्मेदरान ने एक सुर में कहा, “दुर्भाग्य से, सरकार उस क्षेत्र में कदम रख रही है जो उसका नहीं है. अपने नए अधिनियम के माध्यम से वह मुसलमानों की वक्फ संपत्तियों को अपने उपयोग के लिए अधिग्रहित करने की कोशिश कर रही है. इस कदम से मुस्लिमों का मनोबल गिर जाएगा. इसके अलावा, वे एक ऐसे परोपकारी कार्य का हिस्सा बनने से वंचित हो जाएंगे जो विशेष रूप से उनके समुदाय द्वारा किए गए दानों से उन्हें प्राप्त होता है. इसलिए सरकार का यह कदम पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. सरकार को मुसलमानों की आस्था के अनुरूप इसका सम्मान करना चाहिए.”
नया विधेयक भारत में वक्फ का अंत कर देने जैसा है. वर्तमान में यह विधेयक संसद की जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) के पास विचार-विमर्श के लिए है. समिति इस विधेयक पर सभी भारतीयों के विचार मांग रही है, मगर मुसलमान इसके कुछ प्रावधानों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपील करते हुए चाहते हैं कि हमारी मांगों को मानें. वहीं वक्फ-विरासत बचाओ तहरीक सभी मुसलमानों से आह्वान करती है कि वे एकजुट होकर अपनी वक्फ संपत्तियों को शांतिपूर्ण रूप से बचाएँ, जो न केवल उनके कमजोर वर्गों के कल्याण को सुनिश्चित करती हैं, बल्कि उनके विरासत और सामाजिक उत्थान के संवैधानिक अधिकार की भी रक्षा करती है.

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