रामपुर एक छोटी सी रियासत ज़रूर थी मगर उसके मूकाबले की शान और शौकत किसी रियासत में नहीं थी कम छेत्र फल और कम आमदनी के बाबजूद भी रामपूर स्टेट के पास अपना बिजली घर अपनी रेल सुविधा और दर्जनों फैक्ट्रियां तो रामपूर स्टेट की शान थी मगर रामपूर स्टेट के पास रियासत का एक समुन्द्री जहाज़ और लड़ाकू विमान रामपूर स्टेट की शान बान और फौजी ताकत का एहसास कराता था जो हिन्दुस्तान में बड़ी से बड़ी रियासत के पास उस जमाने में नहीं थी रामपूर के नवाब रज़ा अली खां ने कलकत्ते की बंदरगाह में 1000 पाउंड की क़ीमत से जो उस समय एक बड़ी रकम होती थी एक समुन्द्री जहाज़ एम० एच०आई०एस० खरीद कर रामपुर स्टटे को दिया और 11 मार्च 1944 को इस पोत समुंद्री जहाज का उद्घाटन करके उसे ब्रिटिश नेवी बेड़े में शामिल किया नवाब साहब ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा समुन्द्र से हज़ारों मील दूर स्थित छोटी सी रियासत रामपुर के जहाज़रानी के मामले में दिलचस्पी लेना ज़ाहिर में हास्यास्पद प्रतीत होता है लेकिन हमारे लिए इसका विशेष महत्व है रामपुर के बहुत से लोग इंडियन नेवी में कार्यरत हैं इसमें एक कमीशन्ड ऑफिसर भी है इसके अतिरिक्त हम समुन्द्र से समीप हों या दूर, रॉयल इण्डियन नेवी का हित हमें प्रिय है इस समुन्द्री जहाज़ का एक नमूना कोठी ख़ास बाग़ के ए-ब्लॉक के प्रवेश स्थल (Entrance) में लम्बी अवधि तक मौजूद रखा रहा लड़ाकू वायुयान रामपुर फाइटर नवाब रामपुर ने हवाई जहाज़ निर्माण के ब्रिटिश विभाग के मंत्री को 5000 पाउण्ड रवाना करके अनुरोध किया कि इस धनराशि से एक लड़ाकू वायुयान बनाया जाये तथा इस फाइटर हवाई जहाज़ का नाम रामपुर फाइटर रखा जाये द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति पर ब्रिटिश सरकार ने आभार स्वरूप इस जहाज़ के नमूने के बाजू का एक टुकड़ा नवाब रामपुर को भेजा था जो नवाब रज़ा अली खां के जीवन काल में उनकी मेज पर सजा रहता था जो लोग कहते हैं कि रामपूर के नवाबी न ने रामपूर को क्या दिया वह रामपूर स्टेट के इतिहास को पढ़ें तो उन्हें मालूम हो कि रामपूर स्टेट एक ऐसी रियासत थी जो छोटी जरूर थी मगर शिक्षा उधोग और फौजी ताकत में बड़ी से बड़ी रियासत से भी बड़ी रियासत थी इसी ताकत की वजह से रामपूर स्टेट की शान और बान देश की बड़ी से बड़ी रियासत से बड़ी थी
रामपूर के नवाब रज़ा अली खां ने कलकत्ते की बंदरगाह में 1000 पाउंड की क़ीमत का पानी का जहाज फरीदा





