मौला अली को इमाम हमने नहीं, बल्कि अल्लाह ने बनाया” : मौलाना सैफ अब्बास नक़वी

लखनऊ, 25 जून। अशरा-ए-मोहर्रम की नौवीं और अंतिम मजलिस में शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने विलायत के विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मौला अली (अ.स.) की इमामत इंसानों द्वारा तय नहीं की गई, बल्कि उन्हें अल्लाह ने इमाम बनाया है। उन्होंने कहा कि जब अल्लाह ने उन्हें इमाम नियुक्त किया तो मोमिनों ने उनकी इमामत को स्वीकार किया।

अकबरी गेट स्थित इमामबाड़ा सैय्यद तकी साहब में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना ने कहा कि विलायत दीन का अहम हिस्सा है और इसे केवल शरीयत का विषय समझना सही नहीं है। उन्होंने कुरआन और हदीस के हवाले से विलायत की अहमियत बयान करते हुए कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं और कर्बला के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

मौलाना ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जानों की कुर्बानी दी। उन्होंने कहा कि यज़ीद ने समझा था कि वह जीत गया, लेकिन इतिहास ने साबित कर दिया कि आज इमाम हुसैन (अ.स.) का नाम पूरी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है, जबकि यज़ीद अत्याचार का प्रतीक बनकर रह गया।

मजलिस के अंतिम चरण में मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने कर्बला का दर्दनाक मंजर बयान किया। विशेष रूप से हज़रत अली असगर (अ.स.) की शहादत का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऐसा मार्मिक वर्णन किया कि मजलिस में मौजूद अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और पूरे माहौल में ग़म का समां छा गया।

मजलिस के बाद शबीह और ताबूत की ज़ियारत कराई गई तथा अज़ादारों ने मातम कर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदान-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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