इमामबाड़ा सैयद तक़ी साहिब में अशरए मोहर्रम की सातवी मजलिस को ‘‘इनज़ारे नबी और हिदायते वली के उनवान पर संबोधित करते हुए मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि दौरे नबी में विलायत का दावा करने वाले बहुत जन्मे लेकिन जब अमल की मंज़िल आई तो कोई नज़र नहीं आया सिवाए अली के कि जिन्हों ने हर समय रसूल की मदद की यही वजह है कि ईश्वर ने आनी किताब (कुरआन) मेे कहा कि अगर तुम यह दावा करते हो कि तुम ही अल्लाह के वली हो तो मौत की तमन्ना करो, अतः मालूम हुआ कि विलायत उसका हक़ है जो मृृत्यु की तमन्ना करे।
अब इस्लामी इतिहास में कोई ऐसा व्यक्ति अली के अलावा दिखाओ जो इस्लाम के लिये हिजरत की रात चालीस तलवारों में चैन से सोया हो, अगर नहीं मिलता है तो मान लो कि इसे ईश्वर ने अपने नबी की मदद और लोगों की हिदायत के लिये वली बनाकर भेजा है वह अली इब्ने अबीतालिब हैं।
अन्त में मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने जनाबे इमाम हसन के यतीम बेटे जनाबे कासिम की शहादत का दिलसोज़ मनज़र पेश किया जिसे सुनकर अज़ादारों ने गिरया व मातम किया। और ताबूते जनाबे कासिम अ की जियारत कराई गई व तबर्रुकात तकसीम हुए।
मौलाना सैफ अब्बास ने जनाबे कासिम की शहादत का दिलसोज़ मनज़र पेश किया जिसे सुनकर अज़ादारों ने गिरया व मातम किया




