लखनऊ, शिया कॉलेज (आर्ट्स) में शनिवार की शाम मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर और मौलाना मोहम्मद मिर्ज़ा अशफ़ाक की बरसी के मौक़े पर एक मजलिस का एहतेमाम किया गया। मजलिस का आग़ाज़ क़ारी नदीम नजफ़ी की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ।
इसके बाद शायर ए अहलेबैत (अ) नईयर मजीदी, एजाज़ ज़ैदी और बनारस से तशरीफ़ लाए प्रोफेसर अज़ीज़ हैदर ने अपने कलाम पेश किए। प्रोफेसर हैदर ने अपने कलाम में दोनों मरहूम खतीबों के अंदाज़-ए-बयान, इल्मी सलाहियत और मज़हबी ख़िदमात का तज़किरा किया।
मजलिस को मुज़फ़्फरपुर (बिहार) से तशरीफ़ लाए मौलाना असद यावर ने ख़िताब किया। उन्होंने इस्लाम में “अदल” यानी इंसाफ़ की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में मज़लूमों और कमज़ोर तबक़ों पर ज़ुल्म हो रहा है। लेकिन यह सिलसिला इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) के ज़ुहूर के बाद ख़त्म होगा। उन्होंने कहा कि इमाम मेहदी (अ.ज.) की हुकूमत में हर इंसान को बराबरी का इंसाफ़ मिलेगा।
मौलाना असद यावर ने मरहूम मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर और मौलाना मोहम्मद मिर्ज़ा अशफ़ाक की मज़हबी और इल्मी ख़िदमात का तज़किरा करते हुए कहा कि ये दोनों बुज़ुर्ग आलिम-ए-दीन पूरी दुनिया में मजलिसें पढ़ते थे और हर जगह अल्लाह, इस्लाम, कुरआन, रसूल-ए-अकरम (स) और अहलेबैत (अ.) का ज़िक्र करते थे। उन्होंने कहा कि मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर को उनके इल्म और खिताबत की बुनियाद पर “ख़तीब-ए-अकबर” के लक़ब से नवाज़ा गया।
मजलिस के इख़्तिताम पर मौलाना ने हज़रत सकीना (स.अ.) बिन्ते इमाम हुसैन (अ.) के ग़मनाक मसायब का तज़किरा किया और बताया कि किस तरह यज़ीद की ज़ालिम फौज ने चार साल की इस मासूम यतीम बच्ची को क़ैद किया और क़ैदखाने में वह प्यासी शहीद हो गईं।
आख़िर में मजलिस में तशरीफ़ लाने वाले तमाम मेहमानों और अकीदतमंदों का शुक्रिया मौलाना एजाज़ अतहर और मौलाना यासूब अब्बास ने अदा किया।
आने वाले मेहमानों के लिए ऑल इंडिया शिया हुसैनी फ़ंड की जानिब से सबील का भी एहतेमाम किया गया था।
इस मजलिस में उलमा ए कराम जिसमें आयतुल्लाह हामिदुल हसन, मौलाना ज़ाहिद अहमद, मौलाना मीसम ज़ैदी, मौलाना फरीदुल हसन, मौलाना ज़हीर अब्बास (मदरसा नज़मिया), मौलाना जाफ़र अब्बास, मौलाना रज़ा अब्बास और मौलाना मूसा रिज़वी, मौलाना तफ़सीर हसन रिज़वी, मौलाना मेहंदी हसन वाएज़, मौलाना ग़ुलाम पंजतन मुसय्यब के साथ बड़ी तादाद में अक़ीदतमंद मौजूद रहे।





