पूरे देश में कोविड-19 अपना पैर पसारे हुए हैं उसके बारे में डर, खौफ लोगों में पैदा है। फिर भी पूरे देश में लोग सामान्य रूप से अपना काम कर रहे हैं और हर तरफ चहल-पहल दिखाई दे रही है।
चंद दिनों के बाद मोहर्रम भी शुरू हो रहा है अय्यामे अजा बहुत करीब है तरह-तरह की बातें हो रही हैं लेकिन इस संबंध में सरकार के गृह मंत्रालय और जिला प्रशासन को भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि मोहर्रम कोई त्यौहार नहीं है इसमें खुशी नहीं बल्कि ग़म मनाया जाता है त्यौहार वह होते हैं जिसमें खुशी और प्रसन्नता जाहिर की जाती है मोहर्रम में पूरे हिंदुस्तान में हर जगह अलम ताजिये के जुलुस निकलते हैं मजलिसें होती हैं अभी जो गाइडलाइंस जिला प्रशासन जारी कर रहा है उसमें मोहर्रम के जुलूस पर भी पाबंदी की बात कही जा रही है लेकिन जिला प्रशासन और गृह मंत्रालय को इस बात पर ध्यान देना चाहिए ईमानदारी के साथ इन सारी चीजों को अपनी नजरों के सामने रखकर के फैसला करें कि इस वक्त बसों में स्टैंडिंग पोजीशन में 40 से 50 आदमी सफर कर रहे हैं ट्रेनों में सैकड़ों की तादाद में लोग सफर कर रहे हैं सड़कों पर हर तरफ पब्लिक नजर आ रही है सारी चीजें खुली हैं हर जगह भीड़ नजर आ रही है अभी जो कुछ नेता स्वर्गवासी हुए उनके अंतिम यात्रा में भी काफी बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे कई जगह पर धरने और प्रदर्शन की भी तस्वीरें सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं जिसमें सैकड़ों की तादाद में लोग मौजूद हैं तो इन लोगों के लिए गाइडलाइंस कहां है।
दूसरी अहम और जरूरी बात यह है कि शहर और गांव दोनों में बहुत बड़ा अंतर है गांव में जो मोहर्रम के जुलूस निकलते हैं उसमें ज्यादा लोग नहीं होते। कम लोगों के साथ जुलूस निकलता है। गांव में मोहर्रम , दुर्गा पूजा बहुत आराम से आसानी से संपन्न कराया जा सकता है। वहां ज्यादा लोग नहीं होते हैं।
शहर में संख्या ज्यादा हो सकती है लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के साथ इस जुलूस को प्रशासन की निगरानी में आराम से उठाया जा सकता है।
मैं गृह मंत्रालय भारत सरकार और जिला प्रशासन से विनम्र अनुरोध करना चाहूंगा कि इस संबंध में बहुत ही गौर करके अलग से गाइडलाइन जारी करने की कृपा की जाए। जिससे कि संकट के इस दौर में ईश्वर के प्रति लोग अपनी आस्था व्यक्त करके कुछ सुकून हासिल कर सकें।
जयहिंद।
सैय्यद एम अली तक़वी
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