एक महीने पहले मोहम्मद सिराज एक नया नाम था जिसे कोई नहीं जानता था लेकिन आज मोहम्मद सिराज जाना और पहचाना नाम है जिसको सिर्फ भारतवासी ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जानने लगी है।
जहां एक तरफ हमारे देश भारत के अंदर देशभक्ति और देशद्रोह को परिभाषित करने की होड़ लगी हुई है। कुछ जमीर फरोश लोग अपने आप को देशभक्त और दूसरों को या यूं कहूं आलोचना करने वालों को देशद्रोह बताने में लगे हुए हैं।
भारत देश से दूर ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय ने यह बता दिया कि देशभक्ति क्या होती है और देशभक्त कैसा होता है।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के चौथे दिन भारतीय पेसर मोहम्मद सिराज ने पांच विकेट ले कर आधी ऑस्ट्रेलियाई टीम को पावेलियन पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनके इस लाजवाब प्रदर्शन की दिग्गज क्रिकेटर्स ने तारीफ भी की है। लेकिन मोहम्मद सिराज को इस मैच के पहले गालियां भी सुननी पड़ी और ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के कुछ दिन बाद पिता का निधन हो गया था, लेकिन इस खिलाड़ी ने खुद को कमजोर नहीं होने दिया। पूरी ताकत जोश और होश के साथ भारत के झंडे को ऊंचा रखा।
मोहम्मद सिराज के पिता का नाम मोहम्मद गौस था, वे ऑटो ड्राइवर थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन पिता ने सिराज के सपनों को पूरा करने के लिए पैसों की कमी आड़े नहीं आने दी थी। सिराज को अपनी कमाई में से पैसे देते थे। उनकी महंगी किट का इंतजाम करते थे।
जब सिराज आईपीएल 2020 के लिए यूएई गए थे उस दौरान ही उनके पिता की तबीयत ठीक नहीं थी, उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। आईपीएल खत्म होने के बाद सिराज दुबई से ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए निकल गए थे। जहां पहुंचने के कुछ दिनों बाद ही उनके पिता का निधन हो गया। सिराज अपने पिता के अंतिम दर्शन और संस्कार में शामिल नहीं हो पाए।
सिडनी टेस्ट के दौरान सिराज को कुछ ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों ने काफी अपशब्द कहे। नस्लीय अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया था। पीटीआई के अनुसार सिराज के लिए ब्राउन डॉग और बिग मंकी जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए। सिराज को जो शब्द कहे गए वे नस्लीय गालियां थीं। कुछ दर्शक लगातार गालियां दिए जा रहे थे। मगर आज उनको इसकी परवाह नहीं थी उनको तो बस देश के लिए जीत हासिल करनी थी और अच्छा प्रदर्शन करना था जो उन्होंने करके दिखाया।
भारत के इतिहास में अपने देश भारत के लिए कुछ कर गुजरने की जो तारीख है उसमें मोहम्मद सिराज ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
भारत में हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद जैसे विषयों पर घिनौनी हरकत की जा रही है और गलत काम करने वाले लोग अपने आप को देशभक्त और गलत काम की आलोचना करने वालों को देशद्रोही करार दे रहे हैं ऐसे नाजुक समय में मोहम्मद सिराज ने देश से बाहर खेलते हुए देशवासियों को बता दिया कि असली देशभक्ति क्या होती है।
मोहम्मद सिराज ने बता दिया कि असली देशभक्ति वह है कि जब देश की बात आ जाए तो पिता की मृत्यु का समाचार सुनने के बाद उनके अंतिम दर्शन और उनके अंतिम संस्कार को भी देश की खातिर छोड़ दिया। यह कोई मामूली बात नहीं थी अंदर से मोहम्मद सिराज को कितना कष्ट हो रहा होगा यह वह खुद जानते हैं लेकिन उसके बावजूद देश के लिए उन्होंने टीम का साथ देना बेहतर समझा इसका परिणाम सबके सामने है।
विराट कोहली जो भारतीय टीम के कप्तान भी हैं उन्होंने बच्चे की पैदाइश के कारण दौरा छोड़कर भारत आना बेहतर समझा। यह दो चीजें समझने और समझाने के लिए काफी है।
जिस भारत देश ने विराट कोहली को इतना कुछ दिया आज जब उन्होंने जगह बना ली तो उनके लिए शायद भारत का उतना महत्व नहीं रह गया इसीलिए वह पहला टेस्ट हारने के बाद बीच मंझधार में टीम को छोड़कर वापस आ गए। सवाल फिर वही देश भक्ति का!
पिता को याद करके राष्ट्रगान में आंसुओं से श्रद्धांजलि दी।
आप कौन बताएगा कि देशभक्ति क्या है और देशद्रोह क्या है? मोहम्मद सिराज ने देशभक्ति की परिभाषा परिभाषित कर दी।
जयहिंद।
सैय्यद एम अली तक़वी
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