डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सारण जिले के जीरादेई गाँव में हुआ था। उनके पिता महादेव सहाय संस्कृत और फारसी के विद्वान थे, जबकि उनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं।
राजेंद्र प्रसाद का परिवार एक कायस्थ परिवार था, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमोढ़ा गाँव से आया था। उनके दादा और पिता दोनों ही जमींदारी का काम देखते थे।
राजेंद्र प्रसाद की शिक्षा की शुरुआत फारसी और उर्दू से हुई थी, लेकिन बाद में उन्होंने हिंदी और संस्कृत में भी महारत हासिल की। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से विधि परास्नातक (एलएलएम) की परीक्षा पास की और बाद में लॉ के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की।
राजेंद्र प्रसाद ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बार जेल गए। उन्हें भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था और उन्होंने इस पद पर दो कार्यकाल पूरे किए थे।
राजेंद्र प्रसाद का देश और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण संदेश था कि शिक्षा, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता ही देश की तरक्की के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। ¹





