प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए बहुपक्षवाद, आर्थिक-वित्तीय मामलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर चर्चा की। उन्होंने इस बढ़ते बहुध्रुवीय विश्व में ब्रिक्स मंच को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
प्रमुख सुझाव:
– *आंतरिक सुधार*: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें अपनी प्रणालियों में सुधार करना चाहिए ताकि हमारी विश्वसनीयता बढ़ सके और हम बहुपक्षवाद में सुधार की मांग कर सकें। ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक में परियोजनाओं को मंजूरी देते समय मांग-आधारित निर्णय लेने, दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और स्वस्थ क्रेडिट रेटिंग बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
– *ग्लोबल साउथ की आकांक्षाएं*: मोदी ने कहा कि हम ग्लोबल साउथ की विशिष्ट अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। भारत में स्थापित ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच कृषि जैव प्रौद्योगिकी, सटीक खेती और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का एक माध्यम हो सकता है। उन्होंने ब्रिक्स विज्ञान और अनुसंधान भंडार बनाने का भी प्रस्ताव रखा जो ग्लोबल साउथ के देशों को लाभान्वित कर सकता है।
– *क्रिटिकल मिनरल्स और प्रौद्योगिकी*: मोदी ने कहा कि हमें क्रिटिकल मिनरल्स और प्रौद्योगिकी में अधिक सहयोग के अलावा उनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और लचीला बनाने पर ध्यान देना चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी देश इन संसाधनों का उपयोग केवल अपने हितों के लिए या हथियार के रूप में न करे।
– *जिम्मेदार एआई*: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें जिम्मेदार एआई की दिशा में काम करना चाहिए। भारत एआई को मानव मूल्यों और क्षमताओं को बढ़ाने के साधन के रूप में देखता है। ‘एआई फॉर ऑल’ के मंत्र के मार्गदर्शन में भारत विभिन्न क्षेत्रों में एआई का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहा है। एआई प्रशासन में चिंताओं को संबोधित करने और नवाचार को प्रोत्साहित करने दोनों को समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ की कई अपेक्षाएं हैं जिन्हें पूरा करने के लिए हमें ‘अग्रणी उदाहरण’ के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। भारत अपने साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी भागीदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है





