Home / प्राइवेट शिक्षकों का भविष्य खतरे में, भुखमरी की कगार पर शिक्षक। सैय्यद तक़वी

प्राइवेट शिक्षकों का भविष्य खतरे में, भुखमरी की कगार पर शिक्षक। सैय्यद तक़वी

पिछले साल से कोविड-19 और लॉकडाउन की स्थिति के कारण देश की आर्थिक व्यवस्था तो खराब हुई है लेकिन इसके अलावा अगर सबसे ज्यादा कोई प्रभावित हुआ है तो वह है प्राइवेट शिक्षक क्योंकि सरकारी शिक्षकों को कोई परेशानी नहीं है और प्राइवेट शिक्षक जो कोचिंग चला करके या छोटे छोटे स्कूलों में काम करते थे वह स्कूल बंद हो जाने के कारण और कोचिंग बंद हो जाने के कारण उनकी स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
ऐसी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण कई कोचिंग संस्थान और छोटे स्कूल बंद हो गये जिसके सहारे शिक्षक अपना पेट पालते थे वह रास्ता ही खत्म हो गया।
ऐसी भयावह स्थिति के बाद भी देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री कोई भी प्राइवेट शिक्षकों की जीवन यापन पर ध्यान नहीं दे रहा है अभी तक जो भी सहायता की घोषणा की गई है उसमें प्राइवेट शिक्षकों का कहीं भी नाम नहीं है यह तो अजीबोगरीब परिस्थिति है कि लोगों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों की अनदेखी की जा रही है।
सभी कार्य किसी ना किसी तरह चोरी छुपे हो रहे हैं दुकाने अगर बंद हैं तो बैक डोर से सामान बेचा जा रहा है आधा शटर खोलकर के सामान बेचा जा रहा है प्राइवेट बड़े स्कूल पेरेंट्स पर दबाव बनाकर फीस वसूल रहे हैं बड़े स्कूलों के शिक्षकों को सैलरी मिल रही है भले कोई स्कूल आधी सैलरी दे रहा है लेकिन जो छोटे स्कूल है पांचवी और आठवीं तक के स्कूल और जो कोचिंग संस्थाएं हैं उनके संचालकों का और उनके शिक्षकों का बहुत बुरा हाल है लोग अब कंगाल हो चुके हैं और भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं।
पैसे की तंगी के कारण वह स्कूल और कोचिंग की बिल्डिंग का किराया अदा करें या अपना पेट पाले ऐसी भयावह स्थिति और ऊपर से हमारे प्रधानमंत्री महोदय कहते हैं कि हम दूसरी लहर का डटकर मुकाबला कर रहे हैं।
मैं ना तो माननीय मुख्यमंत्री से अपील करूंगा ना माननीय प्रधानमंत्री से अपील कर रहा हूं क्योंकि मुझे मालूम है कि कुछ नहीं करने वाले यह दोनों महानुभाव। स्कूल खुलेंगे ना कोचिंग खुलेगी ना शिक्षा के क्षेत्र में लोग आगे बढ़ेंगे इसलिए अपील करना बेकार है। क्योंकि मेरा काम लिखना है इसलिए मैंने सच्चाई को लिख दिया। बाक़ी दोनों महानुभाव संवैधानिक एक जिम्मेदार पद पर हैं। परिस्थितियों को समझते हैं।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
शिक्षाविद एवं वरिष्ठ पत्रकार लखनऊ

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