Home / प्रश्न: क्या इस्लाम में महिला को इजाजत दी गई है कि वह किसी मस्जिद में जाकर इमामत के फराएज को अंजाम दे ?

प्रश्न: क्या इस्लाम में महिला को इजाजत दी गई है कि वह किसी मस्जिद में जाकर इमामत के फराएज को अंजाम दे ?

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शिया हेल्प लाइन 13 रमजान 26 अप्रैल 2021

कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी षीराज़ी से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रष्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने दिए-
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन षुरू की गयी है जिस मे महिलाओं केप्रष्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
शिया हेल्प लाइन में तमाम मराजए के मुकल्लदीन के दीनी मसायल जानने के लिए स्ुाबह 10 -12 बजे तक 9415580936- 9839097407 इस नम्बर पर संपर्क करें। एवं ईमेलः उंेंमस786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।

प्रश्न: काई व्यक्ति रोज़ा रख कर कोरोना की जांच करवा सकता है।
उत्तर: रोज़ादार रोज़ा की हालत मे कोरोना की जांच करवा सकता है।
प्रश्न: क्या कफ्फारे के साठ रोज़े लगातार रखे जाएगें ?
उत्तर: अगर किसी व्यक्ति पर कफ्फारा वाजिब हो जाए तो एक्तीस (31) रोज़ा लगातार रखना ज़रूरी है उसके बाद फासला कर सकता है।
प्रश्न: क्या इस्लाम में महिला को इजाजत दी गई है कि वह किसी मस्जिद में जाकर इमामत के फराएज को अंजाम दे ?
उत्तर: महिला सिर्फ महिला की इमामत नमाज़ में कर सकती है।
प्रश्न: क्या ज़कात निकालते समय नियत करना ज़रूरी है ?
उत्तरः इस्लाम में हर इबादत के लिए नियत होती है और जब जकात निकाले तो दिल और ज़हन में यह होना जकात दे रहे है काफी है।
पश््रनः र्कुआन की वह आयात जिसको पढ़ने से सजदा वाजिब होता है अगर उनको लिखा जाए तो भी सजदा वाजिब होगा ?
उत्तरः आयाते सजदा को लिखने से सजदा वाजिब नही होता है।

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