नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में इंदौर के परदेशीपुरा में पीएचडी कर चुकी एक महिला फल बेचने को मजूबर है. उन्होंने मैटेरियल साइंस में पीएचडी की डिग्री ली है. उनकी खबर तब वायरल हो गई, जब गुरुवार को उन्होंने म्यूनिसिपल अधिकारियों को खरीखोटी सुनाई.
इस महिला का नाम रईसा अंसारी है. वह परदेशीपुरा में बेकरी स्ट्रीट में अपने परिवार के साथ रहती हैं. उनके भाई-बहन भी पढ़े-लिखे हैं. वह वैज्ञानिक बनना चाहती थीं, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली. उनके भाई-बहन भी सब्जी बेचते हैं. एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने मैटेरियल साइंस में पीएचडी की है. मैं वैज्ञानिक बनना चाहती थी. लेकिन मुझे नौकरी नहीं मिली.”
ये सिर्फ इंदोर के नाही ,बल्की सारे देश के गरिबोंकी आवाज हैं जो रास्ते मे ठेले लगाके अपनी रोजी रोटी चलाते हैं।
अंसारी ने बताया कि मैं फल बेचती हूं लेकिन म्युनिसिपल अफसर मुझे परेशान करते हैं. हमें जानवरों की तरह यहां से वहां भटकना पड़ रहा है. हमें नौकरी नहीं मिलने की वजह हमारा धर्म हो सकता है. लेकिन हमें भारतीय होने पर गर्व है. उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी नौकरी की तलाश है. उनकी मां ने कहा कि वह खुद पढ़ीलिखी नहीं हैं. लेकिन उनके चार बच्चे हैं. इनमें से तीन बहनें और एक भाई शिक्षित हैं. लेकिन उन्हें भी नौकरी नहीं मिली.
अंसारी की मां ने कहा, “जब बात शादी की आई तो एक बेटी ने शादी कर ली. रईसा और शाहजहान बी पढ़ालिखा लड़का चाहती थीं. लेकिन उन्हें अपने लायक लड़के नहीं मिले. कई बार दोनों ने दहेज के चलते शादी करने से इनकार कर दिया. दोनों अविवाहित हैं. मेरे दो नाती जीव विज्ञान पढ़ रहे हैं. वे डॉक्टर बनेंगे.”
रईसा के पड़ोस में रहने वाले लोगों ने उसकी और उसके परिवार की तारीफ की. उन्होंने कहा कि यह पढ़ालिखा परिवार है. उन्हें नौकरी नहीं मिलने की वजह से मजबूरी में फल बेचना पड़ रहा है.