# 🌿 (पोस्ट- 02)
●हदीस:- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः “जो मर्द किसी औरत से उसकी इज्ज़त के सबब निकाह करे, अल्लाह तआला उसकी जिल्लत में ज़्यादती करेगा और जो किसी औरत से उसके माल के सबब निकाह करेगा तो अल्लाह तआला उसकी मोहताजी बढ़ायेगा और जो उसके हसब के सबब निकाह करेगा तो उसके कमीनेपन में ज्यादती फरमायेगा और जो इसलिए निकाह करे कि इधर-उधर निगाह न उठे और पाक दामनी हासिल हो या सिला रहमी करे तो अल्लाह तआला उस मर्द के लिए उस औरत में बरकत देगा और औरत के लिए मर्द में।”
(सुन्नी बहिश्त ज़ेवर 228,)
●हदीस:- हज़रत मआज़ बिन जबल रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है “साहिबे निकाह की नमाज़ बिला निकाह वाले की नमाज़ से चालीस या सत्तर दरजा ज्यादा अफज़ल है।”
नुज़हतुल मजलिस जिल्द 2 पेज 48)
(कुव्वतुल कुबूल जिल्द 2, पेज 464)
●हदीस:- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः “जो गुरबत के सबब निकाह न करे वह हम में से नहीं। नीज़ अल्लाह तआला फ़रिश्तों को हुक्म फरमाता है कि उसकी पैशानी पर लिख दो कि ऐ सुन्नते रसूल के छोड़ने वाले तुझे किल्लते रिज्क की बशारत हो।”
(नुजाहतुल मजालिस जिल्द-2, पेज- 48)
●हदीस:- हज़रत जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि
• रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः “जब तुम में से कोई निकाह करता है तो शैतान कहता है हाय अफसोस इब्ने आदम ने मुझ से अपना दो तिहाई दीन बचा लिया।”
(इस्लाम मे पर्दा पेज 521,)