अध्यक्ष – शिया मरकज़ी चाँद कमेटी
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी द्वारा नए साल के जश्न को नाजायज़ करार देने पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना सैफ़ अब्बास नक़वी ने कहा कि इस्लाम ने न तो न्यू ईयर की पार्टी मनाने का हुक्म दिया है और न ही इसे मना किया है। इसे नाजायज़ ठहराना इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं से मेल नहीं खाता।
मौलाना सैफ़ अब्बास नक़वी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में फुहड़पन, फिजूलखर्ची, और नाच–गाने से हमेशा मना किया गया है, लेकिन नए साल के स्वागत को किसी मजहबी ऐतराज़ की बुनियाद पर हराम या नाजायज़ कहना सही नहीं है।
उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि अगर कोई व्यक्ति नए साल पर खर्च करना चाहता है, तो यह बेहतर होगा कि वह इस कड़कड़ाती सर्दी में गरीबों को कंबल और स्वेटर बाँटकर इंसानियत और हमदर्दी का परिचय दे। यही इस्लाम की असल रूह है — लोगों की मदद करना, नेकी को बढ़ावा देना, और समाज में भलाई फैलाना।
मौलाना ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर बेवजह विवाद खड़ा करने के बजाय समाज के कमजोर तबके की मदद की जाए और नए साल को नेकी के कामों से शुरू किया जाए।




