भारत अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की हरकतों को रोकना चाहता है और घुसपैठ कर सीमा बदलने की चीनी कोशिश पर लगाम लगाना चाहता है तो उसे प्रतिरोधक क्षमता विकसित करनी होगी। यह बात पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ शिवशंकर मेनन ने कही है। इंडियन वूमेंस प्रेस कॉर्प्स द्वारा आयोजित ऑनलाइन चर्चा में मेनन ने कहा, शोर मचाने और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन तैयार करने से कुछ नहीं होने वाला। इन कोशिशों से चीन की हरकतें नहीं रुकने वालीं। चीन को रोकने के लिए भारत को खुद मजबूत होना होगा जिससे पड़ोसी देश को महसूस हो कि वह सीमा पर स्थिति बदलने में कामयाब नहीं हो पाएगा।
मेनन ने कहा कि किसी तरह से संयुक्त राष्ट्र में घुसपैठ की निंदा का प्रस्ताव पारित करा लेने से भी कुछ नहीं होने वाला। जमीन पर हालात जस के तस रहेंगे। अगर हम एलएसी पर यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं तो हमें अपनी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना होगा। वह कुछ वैसी ही होनी चाहिए जो भारत ने अगस्त में पैंगोंग लेक इलाके में दर्शाई थी। भारत के ऊंचाई वाले इलाकों में पहुंचते ही चीन के तेवर ढीले पड़ गए थे और वह पैंगोंग के दक्षिणी किनारे से पीछे हट गया था।