इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। दरअसल, एक एडवोकेट ने कोर्ट रूम में आधा किलो चीनी लहसुन और आम लहसुन लाकर यह दिखाने की कोशिश की कि चीनी लहसुन भारतीय बाजारों में आसानी से उपलब्ध है, जबकि 2014 में इस पर प्रतिबंध लगाया गया था
इस मामले में जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने राज्य सरकार के अधिकारी को तलब करते हुए यह आदेश वकील मोती लाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने भारत के डिप्टी एडवोकेट जनरल सूर्यभान पांडे को निर्देश दिया कि वे प्रतिबंधित वस्तुओं को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए तंत्र के बारे में निर्देश मांगें
यह मामला चीनी लहसुन के हानिकारक प्रभावों के कारण उठाया गया था, जिसमें कहा गया था कि यह कैंसरकारी प्रकृति का है और भारत के गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता है।
जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने में विफल रही है कि चीनी लहसुन पूरे देश में न बेचा जाए




