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ख़तरनाक रूप धारण कर रहा है कोरोनावायरस। शरीर के खून को जमा रहा है।

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कोरोना वायरस (कोविड-19) का कहर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। लगभग हर देश में लॉकडाउन लगा हुआ है लेकिन फिर भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वायरस के खतरनाक प्रभाव से जुड़ी अब एक ऐसी खबर आई है, जिसने डॉक्टरों को चिंता में डाल दिया है। कोरोना वायरस अब रहस्यमयी तरीके से मरीजों के शरीर के अंदर बह रहे खून को जमा (Blood Clotting) दे रहा है। यह चौंकाने वाली घटना अमेरिका में सिर्फ एक-दो जगहों पर नहीं हुई है, बल्कि कई जगहों से ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं।

अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमितों और मरने वालों की संख्या दुनिया के किसी भी देश से सबसे ज्यादा है। डॉक्टरों को पता चला है कि कोरोना वायरस मरीजों के शरीर के विभिन्न अंगों में खून के थक्के जमा रहा है। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्टों को पता चला है कि इससे मरीजों के गुर्दे में भी खून जम रहा है। खून जमने के कारण दिल का दौरा पड़ने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। पीड़ितों की उम्र ज्यादा नहीं है और इनमें से आधे कोविड-19 से पॉजिटिव मिले हैं।

इस अस्पताल के डॉक्टर जे मेक्को ने एक इंटरव्यू में बताया कि ये काफी हैरानी की बात है कि कैसे ये बीमारी खून को जमा रही है। उन्होंने बताया कि कैसे कई डॉक्टरों का मानना है कि कोविड-19 फेफड़ों की बीमारी से भी बड़ी बीमारी है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में ऐसा हुआ है कि दिल का दौरा कम उम्र के लोगों को पड़ा है। जिनका पहला लक्षण कोविड-19 निकला है। विभिन्न विशेषज्ञों ने अब एक नया उपचार प्रोटोकॉल विकसित किया है।
क्लॉटिंग के किसी भी लक्षण का पता चलने से पहले मरीजों को अब खून को पतला करने वाली दवा की उच्च खुराक दी जा रही है। अस्पताल के अध्यक्ष डॉक्टर डेविड रीच ने कहा, हो सकता है, अगर आप थक्के को जमने से रोकते हैं, तो आप बीमारी को कम गंभीर बना सकते हैं। नए प्रोटोकॉल का उपयोग कुछ उच्च जोखिम वाले रोगियों पर नहीं किया जाएगा क्योंकि खून के पतले होने से मस्तिष्क और अन्य अंगों में रक्तस्राव हो सकता है। मार्च के तीन हफ्तों में ही, डॉक्टर मेक्को ने मस्तिष्क में खून ब्लॉकेज के साथ 32 ऐसे मरीजों को देखा है, जिन्हें दिल का दौरा पड़ा है। इनमें स्ट्रोक के लिए कोई स्पष्ट जोखिम कारक भी नहीं मिला है।

हैरानी की बात ये रही कि 32 में से आधे मरीज कोरोना वायरस से पॉजिटिव निकले। माउंट सिनाई के लंग विशेषज्ञ डॉक्टर हूमन पूर ने वेंटिलेटर स्पोर्ट वाले करीब 14 मरीजों में भी कुछ अजीब देखा। जैसी वेंटिलेटर रीडिंग की उन्होंने उम्मीद की थी, नतीजा उससे एकदम अलग पाया। उन्होंने कहा कि इन मरीजों के फेफड़े एक आम निमोनिया के मरीज के फेफड़ों से काफी अलग दिखे। हर सांस के साथ खून का प्रवाह ठीक से नहीं हो रहा था।

हूमन जब उस वक्त किडनी डॉक्टर के पास गए, जिन्होंने कहा कि ऐसा खून का थक्का जमने के बाद होता है। जब डॉक्टरों ने इस मामले में विचार विमर्श किया तो उन्हें इस बात का भी पता चला कि चीन के हुबेई प्रांत में भी मरीजों में खून जमने जैसी घटनाएं सामने आई थीं।

फिलाडेल्फिया के थॉमस जेफरसन विश्वविद्यालय अस्पताल के डॉ पास्कल जबबोर ने भी कोविड-19 से पीड़ित लोगों में दिल का दौरान पड़ने जैसे मामलों में वृद्धि को नोटिस किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी किसी वायरस को इतना नुकसान पहुंचाते नहीं देखा है। बोस्टन में भी कई कोविड-19 मरीजों को खून जमने को रोकने वाली दवाएं दी गईं। जिससे उनमें सुधार देखा गया। यह समस्या वायरस के अधिक प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में कोविड-19 मरीजों में ज्यादा दिख रही है।

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