सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को खुले में खाना खिलाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने नोएडा की एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “आप कुत्तों को अपने घर में क्यों नहीं खिलाते? अपने घर को ही शेल्टर बना लें।” कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या हर गली और सड़क को जानवरों के लिए छोड़ देना चाहिए, जहां इंसान के लिए कोई जगह नहीं बचे।
कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने से होने वाले जोखिमों पर प्रकाश डाला, जैसे कि सुबह साइकिल चलाने वाले, पैदल चलने वाले और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि ग्रेटर नोएडा में फीडिंग पॉइंट बनाए जा रहे हैं, लेकिन नोएडा में नहीं। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए याचिका को एक अन्य लंबित मामले के साथ जोड़ दिया।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह कोई नीतिगत निर्देश या कानूनी मिसाल स्थापित नहीं करता, बल्कि एक विशिष्ट मामले में कोर्ट की टिप्पणी और सुझाव है। कोर्ट ने हर जिले में डॉग शेल्टर होम बनाने की मांग पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया ¹।





