इमामबाड़ा सैयद तक़ी साहिब में अषरए मजालिस की चौथी मजलिस को विलायत और अजादारी के उनवान पर संबोधित करते हुए कहा कि ईष्वर ने कुरआन मे कहा है कि तुम हमारी इताअत करो हमारे रसुल स अ स कि इताअत करो और जिसे हमने वली बनाया है उसकी इताअत करो अब वली को कैसे पहचाना जाए तो खुदा ने इसकी भी व्याख्या क़ुआन मे की है कि वह तुम्हारा वली है जो नमाज़ को कायम करता है और हालते रुकु मे ज़कात देता है तारीखो से मिलता है कि जकात जिसने दी है वह कोइ और नही अली अ स थे जिससे यह बात साबित होती है कि विलायते अली अ स के बिना ना तो इताअत पुरी हो सकती है ना ही इबादत और ना ही दीन मुकम्मल होगा!
अन्त में मौलाना ने फरजन्दाने मुस्लिम जनाबे मोहम्मद व जनाबे इब्राहीम की गुरबत और षहादत को बयान किया जिसे सुनकर अज़ादारों की आंखों में आंसू आ गये और गिरया व मातम किया।
