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इमामे हुसैन का मक़सद नाना के दीन को बचाना

लखनऊ के एक बुजुर्ग मौलाना ने इस वर्ष की मोहर्रम के 10 दिनों की मस्जिदों में अपने वही जवानी के अंदाज में राजनीतिक तरीके से, चाहे लखनऊ के मिम्बर या क़ौम की जितनी हंसी उड़े बेज्जती हो,कोई फ़र्क़ नहीं याद रहे कि इन मौलाना की खुद क़ौम युवाओं के लिए रोज़गार आदि जैसी जिम्मेदारी उठाने का कोई प्रूफ नहीं है,
दो ऐसे मुद्दे उठाए जिन का सोशल मीडिया व अहलेबैत से इश्क करने वाले,इन दोनों मुद्दों का जमकर विरोध कर रहे हैं,
पहेला मुद्दा ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़मनाई की पुरानी वीडियो जो फिलिस्तीन के नागरिकों की हिमायत करते हुए,
उन्हे अहलेबैत से मोहब्बत करने वाला बता रहे हैं, वीडियो के नीचे हिंदी में स्लाइड अनुवाद चल रहा है,आयतउल्लाह कह रहे हैं कि फिलिस्तीनी सुन्नी है- लेकिन अहलेबैत से मोहब्बत करने वाले है, फिलिस्तीन नागरिक, नसिबी नहीं है,कहां रहे है, शायद ये इल्जामात फिलिस्तीन की आवाम पर पुराने हैं, जिनको वर्तमान मौलाना ने उठाए हैं, खास बात यह है कि वीडियो में आयतउल्लाह कह रहे हैं ऐसे लोगों पर, अल्लाह की लानत हो
शैतान-ए-रजीम ख़बीस पर,
अपनी जवानी के वक़्त में ये बुजुर्ग मौलाना एक अयातुल्लाह पूर्व ईरानी राष्ट्रपति के क़मा के मातम के फतवे पर एक नेता की तरह विरोध कर चुके,
ख़ैर मौलाना ने अपनी मजलिस में वही पुराने फिलिस्तीनियों पर इल्जाम लगाते हुए कहा कि अहलेबैत से मोहब्बत करने वाले नहीं,
जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है,क़ौम के बुद्धिजीवियों की तफतीश व आयतुल्लाह ख़मनाई साहब पुरानी वीडियो से साबित होता है कि मौलाना का लगाया हुआ, आरोप में बुनियादें,

दूसरे मुद्दा मौलाना ने कहा कि नमाज़ की क़ज़ा अदा की जा सकती है,
नमाज़ पैसे देकर पाड़वाई जा सकती है,
लेकिन अज़ादारी की क़ज़ा नहीं है,
शायद मौलाना अपनी वृद्धावस्था की वजह से भूल रहे हो या कोई राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इमाम हुसैन की शहादत का मक़सद ही बदल रहे हो , लेकिन चलिए आज के कुछ मौलानाओं के ख़िताबत को क़ौम संजीदगी से नहीं लेती है, इसी वजह से समझदार लोग ऐसी मजलिसों में अपने बच्चों को नहीं भेजते हैं, जहां दीन की तालीम नहीं दी जा रही, जिसकी वजह से लखनऊ की मजलिसों में क़ौम बहुत कम जा रही है, याद रहे की
हमारे बुजुर्ग मौलाना,जो आज दुनिया में नहीं है, अल्लाह उनको जन्नत नसीब करें,
लखनऊ के तमाम मिम्बर पर यही पढ़ते थे, कि इमामे हुसैन ने कर्बला में जो शहादत पेश की वो केवल नाना के दीन को बचाने के लिए,
उन्होंने एक रात की यजीदी फौज से मोहलत मांगी की अल्लाह की इबादत कर ले, 9 मोहर्रम रात भर भूखे-प्यासे बच्चों,जवान ,औरतों ने वो इबादत की के यज़ीदी फौज के कमांडर हज़रत हुर का दिल लर्ज़ गया, हक-बातिल समझ में आ गया,(जो हमारे वर्तमान बुजुर्ग मौलाना भूल चुके हैं)
सुबह हाथ बांध के इमाम की बारगाह में हाजिर हुआ, मौला मुझे माफ कर दें,
मौला ने कुछ नहीं सवाल किया,किसी से नहीं पूछा,
आपने कहा मैंने माफ किया और मेरे अल्लाह ने माफ किया,(अगर आज के हमारे लखनऊ के मौलाना कर्बला में मौजूद होते तो मौला को रोक लेते, और कहते,
क्या मौला ये क्या कर रहे हैं आज ,
इसकी वजह से तो हम दुश्मनों में घिरे हैं,
आप हम लोगो की राय/मशवरे के बिना कैसे इसको माफ कर सकते हैं) मौला ने माफ किया सब ने माफ किया,

10 मोहर्रम फ़जर की अज़ान हज़रत अली अकबर ने देना शुरू की यज़ीदी फौज की तरफ से पहला तीर आया,

ज़ोहर का वक्त हुआ, मज़लूम
इमाम ने यज़ीदी फ़ौज से नमाज़ की मोहलत मांगी यज़ीदी फ़ौज से आवाज आई नहीं हुसैन नहीं ये,जंग अब तब ही रुकेगी, या तो तुम बैयत कर लो, या तुम्हारा कत्ल हो जाए,
जोहरे क़ैन ने इमाम की इमामत मे नमाज़ जमात पर आते हुए, तीर अपने सीने पर रोकते हुए नमाज़ पूरी कार्रवाई व शहादत पेश की,

असर का वक़्त आया इमाम ने तलवार मियाआन में रखी. भागी हुए फौज करीब आ गई,इतने तीर लगे के घोड़े पर से तीरो पर गिरे,असर का आखरी सजदा किया,
गोया कर्बला में इमाम बताना चाह रहे थे कि देखो मेरे बाबा नमाज में क़त्ल किया गया ,और मुझे भी सजदे में,अगर नमाज़ का वक़्त न होता तो किसी की मजाल थी तलवार का वार मेरे बाबा या मेरे बदन पर लगा देता,
सोशल मीडिया पर अभी एक मौलाना द्वारा तक़रीर सुनी के एक मौलाना का इंतकाल हुआ,तो इमामे हुसैन से मुलाक़ात हुई, इमाम हुसैन ने आपको नहीं पहचाना,अपने इमामे हुसैन को सलाम करते हुए,कहा मौला पहचाना, आपने कहा नहीं,
तुम कौन ? आपसे मोहब्बत करने वाला, आपके गम में रोने वाला,
आपने कहा तुम मेरे पर क्यों रोते थे, कहा आप पर रोना इबादत है,
कहां दीन के लिए क्या करते थे,नमाज पढ़ते एवं क़ायम करते थे,रोज़ा रखते थे, ज़ुल्म,अत्याचार नाइंसाफी, न्याय, के लिए उठ खड़े होते थे,कहा नहीं,
तो तुम यज़ीद पर क्यों नहीं रोते थे,
मैंने तो अपने नाना के दीन
को बचाने के लिए अपनी व अपने घरवालों की शहादत पेश की, तुम यही काम नहीं करते थे,
अल्लाह व्यवसायिक मौलाना हिदायत दे, अमीन

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