सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए और सड़कों पर उनकी वापसी पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा, कोर्ट ने शेल्टर होम में कुत्तों के साथ क्रूरता पर रोक लगाने और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
*आदेश की मुख्य बातें:*
– आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखना और सड़कों पर उनकी वापसी पर रोक लगाना।
– शेल्टर होम में कुत्तों के साथ क्रूरता पर रोक लगाना और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करना।
– शेल्टर होम में पशु चिकित्सा सुविधाएं और जिम्मेदार कर्मचारियों की नियुक्ति।
– कुत्तों के काटने की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करना और 4 घंटे के भीतर कार्रवाई करना।
*सुनवाई और दलीलें:*
– सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर है और लोगों की सुरक्षा के लिए उन्हें मानव बस्तियों से अलग करना जरूरी है।
– वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि शेल्टर होम में जगह की कमी है और कुत्तों को पकड़ने के बाद नसबंदी व टीकाकरण के लिए उचित सुविधाएं नहीं हैं।
– वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार को एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों का पालन करना चाहिए, जिसमें नसबंदी और टीकाकरण के बाद पुनर्वास शामिल है।
*कोर्ट की टिप्पणियां:*
– कोर्ट ने कहा कि यह मामला लोगों और कुत्तों दोनों के हित में है, और इसका समाधान विवाद के बजाय सहयोग से होना चाहिए।
– कोर्ट ने 11 अगस्त के आदेश के विवादास्पद हिस्सों की समीक्षा करने और फैसला सुरक्षित रखने की बात कही है।
*निष्कर्ष:*
– सुप्रीम कोर्ट का आदेश आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेने और लोगों की सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
– कोर्ट का फैसला जल्द ही आने की उम्मीद है, जो इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करेगा।


