आज़म खान की सजा पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 29 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

नई दिल्ली | 25 सितंबर 2026 | शाबू ज़ैदी

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म खान की सजा पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानना चाहा कि आज़म खान की सजा पर रोक लगाना क्यों जरूरी है। आज़म खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील रखी कि आगामी चुनाव को देखते हुए सजा पर रोक जरूरी है।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी नहीं की और अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 29 सितंबर की सूची भी प्रकाशित है।

सिब्बल ने चुनाव का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने मुख्य रूप से चुनाव से जुड़े प्रभाव का मुद्दा रखा। उनका तर्क था कि सजा जारी रहने की स्थिति में आज़म खान के राजनीतिक अधिकारों और चुनावी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सजा पर रोक की मांग की गई।

वहीं अदालत ने इस मांग के औचित्य पर सवाल करते हुए पूछा कि सजा पर रोक लगाने की आवश्यकता आखिर क्यों है। इसका अर्थ यह है कि अदालत इस स्तर पर राहत देने के लिए प्रस्तुत किए गए आधारों की न्यायिक कसौटी पर जांच कर रही है।

आज़म खान को किस मामले में सजा हुई?

आज़म खान से जुड़े अलग-अलग आपराधिक मामलों में अदालतों में कार्यवाही चल रही है। हाल में रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक भाषण से जुड़े मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो वर्ष की सजा को बरकरार रखा था। यह मामला 29 मार्च 2019 के भाषण और चुनाव आचार संहिता से संबंधित था।

इसके अलावा आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म से जुड़े दो पैन कार्ड मामले में भी न्यायिक कार्यवाही हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में दोनों को सात-सात वर्ष की सजा सुनाई गई थी और बाद में अपील की कार्यवाही भी हुई।

सजा पर रोक और दोषसिद्धि पर रोक में अंतर

कानूनी तौर पर सजा (sentence) पर रोक और दोषसिद्धि (conviction) पर रोक अलग-अलग राहतें हैं। किसी व्यक्ति की सजा निलंबित होने का अर्थ यह जरूरी नहीं कि उसकी दोषसिद्धि भी स्वतः समाप्त या स्थगित हो गई हो। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों में भी कहा गया है कि दोषसिद्धि पर रोक सामान्य राहत नहीं है और इसके लिए असाधारण परिस्थितियों का आधार देखा जाता है।

आज़म खान के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल है कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें किस प्रकार की अंतरिम राहत दी जा सकती है और उसके लिए क्या कानूनी आधार बनता है।

29 सितंबर पर टिकी नजर

अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन अदालत आज़म खान की ओर से रखे गए चुनाव संबंधी तर्कों और सजा पर रोक की मांग पर आगे विचार कर सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *