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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख खो चुका है हिंदुस्तान।

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देश की भाजपा सरकार चाहे जितना चीखे और चिल्लाए कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत विश्व गुरु बन गया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख बिल्कुल गिर चुकी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में अपनी अज्ञानता का परिचय दे रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है इससे पहले भी पूरा विश्व इनके ज्ञान से परिचय प्राप्त कर चुका है। पहले मैट्रिक पास, फिर ग्रेजुएट, इंटायर पॉलीटिकल साइंस , कंप्यूटर फॉन्ट में मार्कशीट, नाले से गैस, आलू से सोना, प्लास्टिक बोतलों से जैकेट इत्यादि यह सब वह चीज हैं जिससे उनके ज्ञान का पता पूरे दुनिया को चल चुका है।
लेकिन एक बार फिर अपने ज्ञान का परिचय पूरी दुनिया को देना चाह रहे हैं जब देश में लोकसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान हुआ तब भी उनके ज्ञान का प्रकाश पूरी दुनिया में लोगों ने महसूस किया और दूसरे चरण के मतदान से पहले लगातार सत्ता प्राप्ति के लिए उनके द्वारा दिए गए भाषण चर्चा का विषय बने हुए हैं।
सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि भारतीय मीडिया के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे अपने अखबारों में जगह दी है।
प्रधानमंत्री के द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ विशेषण के कारण इनकी शिकायत भी चुनाव आयोग में कांग्रेस नेताओं ने की है। कांग्रेस नेताओं नें इल्जाम लगाया कि प्रधानमंत्री देश में नफरत का बीज बो रहे हैं।
सवाल नफ़रत के बीज का नहीं है सवाल यह है कि एक इंसान प्रधानमंत्री जैसे पद पर होते हुए खुले आम हजारों लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए लगातार उन बातों को बोल रहा है जिन बातों का कहीं कोई अस्तित्व ही नहीं है सीधे शब्दों में कहा जाए तो झूठ बोल रहा है। पद की गरिमा से ही व्यक्ति की गरिमा होती है लेकिन जब आप पद की गरिमा गिराएंगे तो आपकी गरिमा खुद-ब-खुद गिरती चली जाएगी।
21 अप्रैल को राजस्थान के बांसवाड़ा में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ( पद्म विभूषण अवार्ड, जवाहरलाल नेहरू जनशताब्दी पुरस्कार, एशिया मनी अवार्ड, यूरो मनी पुरस्कार, एडम स्मिथ पुरस्कार, राइट पुरस्कार एवं मानद उपाधियों से सम्मानित) के पुराने भाषण का हवाला देते हुए जिस तरीके से उन्होंने एक विशेष समुदाय के लिए “घुसपैठिये” और “ज्यादा बच्चे पैदा करने वाला” जैसे शब्द इस्तेमाल किया वह अपने आप में दुख की और शर्म की बात है। इससे विचार और व्यक्तित्व का पता चलता है।
अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने 22 अप्रैल को “मोदी पर चुनावी रैली में मुसलमान के खिलाफ नफरती भाषण देने का आरोप” शीर्षक से रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट पर जगह दी।
इसके अलावा चीनी न्यूज वेबसाइट “साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट” ने लिखा कि चुनाव में बढ़त हासिल करने के लिए मोदी ने मुस्लिम विरोधी बयानबाजी शुरू कर दी है।
साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर श्री अजय गुडावर्ती का हवाला देते हुए लिखा है कि लोग अब इस चीज से तंग आ चुके हैं अब हिंदू मुसलमान का मुद्दा जमीन पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक श्री अपूर्वानंद के हवाला देते हुए वेबसाइट ने लिखा है कि मुसलमान के खिलाफ सांप्रदायिक और नफरत की भावनाओं को भड़काने के मामले में मोदी अपनी आदत से मजबूर हैं और दोषी हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका में मुसलमान के अधिकारों के लिए काम करने वाले काउंसिल ऑफ अमेरिकन इस्लामी रिलेशंस (सीएसआईआर) के उस बयान को रिपोर्ट में जगह दी गई है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की आलोचना की गई है।
भारत अब इस स्थिति में आ गया है जहां प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जैसे उच्च पद पर आसीन लोगों के बयानों की ना सिर्फ़ भारत में निंदा हो रही है बल्कि विदेशों में भी निंदा की जा रही है।
इन 10 सालों में रूस और ईरान से संबंध भारत के वैसे भी उस तरह के नहीं रहे जैसे पहले थे। हां इसराइल से जरूर संबंध मजबूत हुए हैं जिसका असर बाकी देशों के साथ संबंध पर भी पड़ रहा है।
यह बात तय हैं कि 2024 के चुनाव के बाद जो जो हथकंडे सत्ता प्राप्त करने के लिए भाजपा सरकार कर रही है अगर उसमें सफल हो गई तो आने वाले 5 साल भारत के लिए बहुत ही ज्यादा कठिनाई वाले होंगे। इसलिए इस चुनाव में बहुत सोच समझ के वोट डालना होगा। और वोट डालते वक्त संविधान, बेरोजगारी, महंगाई , नफरत, पेपर लीक, किसान समस्या इन सबको अपनी नजरों के सामने रखना होगा।
जय हिन्द।

सैयद एम अली तक़वी
लेखक एवं पत्रकार

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