जी हां। कोबरा का आगमन हो गया है जिसने आते के साथ ही फिल्मी स्टाइल में खतरनाक डायलॉग जनता के हवाले कर दिया।
बीजेपी में शामिल होते ही मिथुन चक्रवर्ती बोले- ‘मैं एक कोबरा हूं, लोगों को एक बार में डसकर मार भी सकता हूं। कोबरा क्या कर सकता है क्या नहीं कर सकता यह सब को पता है। कोबरा कहां आता है कहां रहता है यह सबको पता है इसकी ज़्यादा व्याख्या करने की जरूरत नहीं है।
हां एक बात कह सकता हूं कि जहां पर कोबरा रहता है वहां से इंसान बहुत दूर रहता है हम ऐसे में अगर जहां कोबरा के साथ इंसान नजर आए तो फिर समझ लीजिए कि वह इंसान नहीं है वो इंसान की शक्ल में एक कोबरा ही है।
नेशनल एवं फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली से पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने मिथुन चक्रवर्ती का पार्टी में स्वागत किया और घोष ने चक्रवर्ती को पार्टी का झंडा सौंपा।
इसके बाद राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता ने कहा कि वह हमेशा से वंचितों के लिए काम करना चाहते थे और भाजपा ने उन्हें अपनी आकांक्षा पूरी करने के लिए एक मंच दिया है।
सवाल यह है कि क्या उनको सेवा करने के लिए अब मंच मिला है? इससे पहले कम्युनिस्ट पार्टी और तृणमूल कांग्रेस में बतौर राजनेता रहे और राज्यसभा में भी मनोनीत हुए तो क्या वहां पर मंच नहीं था वहां पर क्या उनको धरातल मिली थी?
उन्होंने मजेदार बात कही। उन्होंने कहा कि ‘‘मैं हमेशा जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता था, लेकिन कभी भी इतनी बड़ी रैली का हिस्सा बनने का सपना नहीं देखा था,
क्या इन्होने पहले जीवन में कोई बड़ा काम नहीं किया था । एक लोकप्रिय फिल्म कलाकार होना नेशनल पुरस्कार प्राप्त करना फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त करना क्या यह इनकी नजर में बड़ा कार्य नहीं था। क्या जनता की सेवा करने के लिए राजनीतिक पार्टी से जुड़ना जरूरी है न जाने कितने ऐसे लोग हैं जो स्वतंत्र रूप से समाज की सेवा कर रहे हैं और वास्तविक रूप में समाज की सेवा कर रहे हैं। कौन बनेगा करोड़पति सीरियल में ऐसे न जाने कितने लोगों को जनता के सामने लाकर पेश किया गया कि जो वास्तव में समाज सेवा कर रहे हैं। समाज सेवा करने के लिए पचास हजार और एक लाख की भीड़ जमा करके स्टेज से भाषण देना जरूरी नहीं है समाज सेवा स्वतंत्र रूप से, व्यक्तिगत रूप से भी की जा सकती है।
हां यह बात अलग है जनता की सेवा करने के बहाने राजनीति में शामिल होकर के लोग अपने और अपने परिवार वालों की ही सेवा करने लगते हैं और देखते ही देखते हैं एक फकीर अमीर बन जाता है।
मिथुन चक्रवर्ती को जागरूक अभिनेता के रूप में देखा जाता था और अक्सर उन्हें वामपंथी फिल्म निर्देशकों द्वारा अपनी फिल्मों में लिया जाता था। मिथुन चक्रवर्ती का तृणमूल कांग्रेस में शामिल होना एक हैरानी के तौर पर नहीं आया था। हालांकि, भाजपा में शामिल होने के उनके कदम को उनके पहले के राजनीतिक विचारों के बिल्कुल उलट देखा जा रहा है।
फिलहाल मिथुन चक्रवर्ती ने यह कहते हुए अपने निर्णय को सकारात्मक रूप देते हुए कहा है कि वह हमेशा से गरीबों की सेवा करना चाहते थे।
अब जो सबसे बड़ा सवाल है यही है कि कोबरा के आने से वहां का माहौल कैसा रहेगा? वातावरण में पहले से ही ज़हर घोला जा चुका था आरोप-प्रत्यारोप, हिंसा, दलबदल यह सारी चीजें वहां पर एक साथ नजर आ रही हैं ऐसे में एक और कोबरा के आगमन से और उसके फुंकार से वहां का माहौल और कितना ज्यादा जहरीला प्रदूषित होगा या आने वाला वक्त बताएगा या फिर फिल्मों की तरीके से यह आने वाला नया कोबरा लोगों के अंदर भरे हुए उस ज़हर को वापस चूस लेगा!
बंगाल चुनाव अभी बाकी है मेरे दोस्त।
जयहिंद।
सैय्यद एम अली तक़वी
लखनऊ
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