बहराइच, 17 मई 2025: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर आयोजित होने वाले प्रसिद्ध जेठ मेले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मेले के आयोजन की अनुमति दे दी है, जिससे आयोजनकर्ताओं और लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है। यह फैसला दरगाह प्रबंध समिति द्वारा जिला प्रशासन के मेले पर रोक लगाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आया है।
जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव प्रथम की खंडपीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार और दरगाह कमेटी के तर्कों को सुनने के बाद स्पष्ट आदेश दिया कि मेला निर्धारित तिथियों पर आयोजित किया जा सकता है। मेले का उद्घाटन 15 मई को प्रस्तावित था, जबकि 18 मई से गाजी सरकार की बारात निकलने की तैयारी थी। हालांकि, जिला प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए मेले की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
पृष्ठभूमि और विवाद:
सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगभग 800 वर्षों से जेठ मेले का आयोजन होता आ रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। यह मेला धार्मिक और सांस्कृतिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ शामिल होते हैं। इस वर्ष, प्रशासन ने हाल की हिंसक घटनाओं और संवेदनशील माहौल का हवाला देते हुए मेले पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ दरगाह प्रबंध समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें मेले को सांप्रदायिक सद्भाव और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
कोर्ट का तर्क और आदेश:
सुनवाई के दौरान दरगाह कमेटी ने तर्क दिया कि मेला एक ऐतिहासिक परंपरा है और इसे रद्द करना सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाएगा। दूसरी ओर, प्रशासन ने संसाधनों की कमी और सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद यह स्पष्ट किया कि मेले के आयोजन से धार्मिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगेगी और प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि मेला एक धर्मनिरपेक्ष आयोजन है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
प्रशासन की तैयारियां:
हाईकोर्ट के फैसले के बाद जिला प्रशासन ने मेले के आयोजन के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। एसपी सिटी रामानंद कुशवाहा ने बताया कि मेले के क्षेत्र को 5 जोन और 11 सेक्टरों में बांटा गया है, और ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जाएगी। दरगाह के आसपास पुलिस और पीएसी की भारी तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
श्रद्धालुओं और आयोजनकर्ताओं की प्रतिक्रिया:
दरगाह कमेटी के अध्यक्ष बकाउल्लाह ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह श्रद्धालुओं की आस्था और परंपरा की जीत है। स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों ने भी इस फैसले पर खुशी जताई, क्योंकि मेला उनकी आजीविका का प्रमुख स्रोत है। श्रद्धालु राम प्रसाद ने कहा, “हम हर साल इस मेले में हिस्सा लेते हैं। कोर्ट का फैसला हमारे लिए खुशी की बात है।”
आगे की राह:
हाईकोर्ट के इस फैसले से मेले के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन अगली सुनवाई 19 मई को होनी है, जिसमें कोर्ट इस मामले में और विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर सकता है। तब तक प्रशासन और दरगाह कमेटी को मिलकर मेले को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
निष्कर्ष:
बहराइच का जेठ मेला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। हाईकोर्ट के इस फैसले ने न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान दिया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि ऐतिहासिक परंपराएं सुरक्षा और व्यवस्था के साथ जारी रहें।
(नोट: यह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया पोस्ट से संकलित की गई है। तथ्यों की सटीकता के लिए संबंधित आधिकारिक स्रोतों का अवलोकन करें।)
बहराइच दरगाह जेठ मेले को हाईकोर्ट की हरी झंडी, प्रशासन की रोक हटी





