अलीगढ़ समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के काफिले पर हमले की घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
करणी सेना और क्षत्रिय समाज के लोगों ने उनके काफिले पर टायर फेंके और काले झंडे दिखाए,
जिससे कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और कुछ कार्यकर्ता घायल हो गए। यह घटना बुलंदशहर के सुनेहरा गांव में दलित समाज के लोगों पर हुए हमले के बाद हुई,
जिसमें चार लोगों को एक काले रंग की थार से कुचल दिया गया था।
इस हमले के पीछे के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह घटना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
रामजी लाल सुमन का काफिला जब अलीगढ़ से गुजरा, तो करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया और टायर फेंके। पुलिस ने काफिले को रोक लिया और रामजी लाल सुमन को वापस कर दिया।
इस घटना पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं हो रही हैं, कुछ लोग इसे कानून व्यवस्था की विफलता के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक विरोध के रूप में देख रहे हैं। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे सकती है ¹।



