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सिंधु नदी जल समझौते को रद्द करने से कश्मीर का होगा फायदा :उमर अब्दुल्ला

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल समझौते पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्हें कभी भी इस समझौते के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना है कि इस समझौते से कश्मीर के लोगों को नुकसान हुआ है और अब केंद्र सरकार द्वारा समझौता तोड़ने से कश्मीरी लोगों को फायदा होगा।

*उमर अब्दुल्ला का बयान:*

– उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि उन्हें कभी भी सिंधु जल समझौते के पक्ष में नहीं थे।
– उनका मानना है कि इस समझौते से कश्मीर के लोगों को नुकसान हुआ है।
– अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समझौता तोड़ने से कश्मीरी लोगों को फायदा होगा।

*सिंधु जल समझौता:*

– सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था।
– इस समझौते के तहत, भारत को पश्चिमी नदियों के पानी का उपयोग करने की अनुमति नहीं है, जबकि पाकिस्तान को पूर्वी नदियों के पानी का उपयोग करने की अनुमति है।
– समझौते के तहत, भारत को अपने हिस्से के पानी का उपयोग करने की अनुमति है, लेकिन पाकिस्तान को भी अपने हिस्से का पानी मिलना सुनिश्चित किया गया है।

*केंद्र सरकार का निर्णय:*

– केंद्र सरकार ने हाल ही में सिंधु जल समझौते को तोड़ने का निर्णय लिया है।
– सरकार का मानना है कि यह निर्णय कश्मीरी लोगों के हित में होगा।
– इस निर्णय के बाद, कश्मीरी लोगों को अपने जल संसाधनों का उपयोग करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।

*कश्मीरी लोगों की प्रतिक्रिया:*

– कश्मीरी लोगों की प्रतिक्रिया इस निर्णय पर मिली-जुली है।
– कुछ लोगों का मानना है कि यह निर्णय उनके हित में होगा, जबकि अन्य लोगों को लगता है कि इससे समस्याएं बढ़ सकती हैं।
– यह देखना होगा कि इस निर्णय का कश्मीरी लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है [1]।

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