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हिन्दुस्तान के संविधान का मज़ाकः उत्तरा खण्ड में कामन सिविल कोड लागू:मौलाना सै0 साएम मेहदी

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लखनऊ। 28 जनवरी, 2025
ऑल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना साएम मेहदी आले गुफरानमाब ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि मैंने पहले ही लिखित और मौखिक रूप में इसका विरोध किया था क्योंकि भारत के संविधान के अनुसार कामन सिविल कोड की अनुमति नहीं देता है। भारत के संविधान ने हर धर्म को बराबर का हक़ दिया है और अपने अपने धर्म पर चलने की पूरी आज़ादी दी है। उत्तराखण्ड सरकार ने केन्द्रीय सरकार की खुशामद में अपने यहां पहले ही कामन सिविल कोड को लागू कर के भारत के संविधान का मज़ाक बनाया है। इसकी जितनी भी निन्दा की जाये कम है। देश के लिये क़ानून संसद से पास होते हैं। केन्द्रीय सरकार अब इस पर ग़ौर कर रही है। कितनी अजीब बात है मौलाना साएम मेहदी ने कहा कि मजेदार बात यह है कि क़बाईली समाज इससे मुसतशना है क्यों कहा वह समाज हिन्दुस्तानी नहीं है। इससे साफ होता है कि हम जिस को चाहेंगे आसानी देंगे और जिसको चाहेंगे परेशान करेंगे? मौलाना ने कहा कि अदालत का दरवाज़ा हमरे लिये अभी भी खुला है और इस पर हमारा भरोसा भी है। मुसलमान अदालत से सम्पर्क करेेगा। मौलाना ने कहा कि इस तरह वक्फ़ संशोधन बिल भी जो जल्द ही संसद में पेश होने वाला है हम इसके नतीजे से भी आगाह हैं लेकिन इसके एलान का इंतिज़ार कर रहे हैं। इसके लिये भी अभी से हमको तैयार कर लेना चाहिये क्योंकि केन्द्रीय सरकार की नियत साफ नहीं है और वक़्फ़ संशोधन बिल संसद में पास होगा जिसके बाद सिवाए मुसलमानों को अदालत से सम्पर्क के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

भवदीय

(रहबर अली)
मीडिया प्रभारी बोर्ड

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