सर सैयद से कम नहीं थे न्यायमूर्ति करामत हुसैन
करामत गर्ल्स कॉलेज की स्थापना 1910 में हुई, जिसकी पहले प्रधानाचार्य स्वर्गीय अमीन पोप हुई जिनका इंग्लैंड से प्रधानाचार्य पद के लिए लखनऊ लाया गया था,
इसके संस्थापक न्यायमूर्ति सैयद करामत हुसैन थे जोकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद से कम नहीं थे,
न्यायमूर्ति करामत हुसैन
जिनके माता-पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था,
करामत हुसैन का पालन पोषण उनके चाचा हामिद हुसैन ने किया, सैयद करामत हुसैन बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहते थे,लेकिन किस्मत उनसे कुछ और करवाना चाहती थी
लगभग 32 साल की उम्र में राजा नरसिंहगढ़ के बेटे के साथ इंग्लैंड कानून की पढ़ाई करने गए,
लौट कर उन्हें ने देखा कि हिंदुस्तान के सभी समुदाय के लड़का- लड़की देश व विदेश में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं,बस खाली मुस्लिम समुदाय की बेटियां अशिक्षित रहे जाती है
जिसके लिए उन्होंने मुस्लिम समुदाय में बेटियों के लिए स्कूल खोलने की पेशकश रखी,
जिसका मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हर धार्मिक तरीके से विरोध एवं रोकने की कोशिश की,
लेकिन करामत हुसैन ने ऐसे विरोध का सामना करते हुए, कैसरबाग कबूतर वाली कोठी किराए पर लेकर उसमें गर्ल्स कॉलेज की शुरुआत की,
जिसमें मुस्लिम समुदाय की बेटियां पढ़ना चाहती थी पर माता-पिता व मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में स्कूल नहीं आती थी
उन्होंने घर-घर जाकर उनके माता-पिता को समझाया धीरे-धीरे मुस्लिम परिवार भी अपनी बेटियों को स्कूल भेजने लगे,
धीरे-धीरे स्कूल की जगह कम पड़ने लगी
यह स्कूल गोमती नदी के किनारे निशातगंज में एक बड़ी जमीन पर खुलवाया गया, जहां पर खास पर्दे का ध्यान रखा जाता था, पढ़ाने वाली टीचरों से लेकर हर पद पर महिलाएं रखी जाती थी, धीरे-धीरे ये बात पूरे उत्तर प्रदेश में फैल गई और लखनऊ शहर के बाहर की भी मुस्लिम लड़कियों स्कूल में दाखिले के लिए अपनी इच्छा जताने लगी, न्यायमूर्ति करामत हुसैन ने बड़ी कोशिश करके एक गर्ल्स हॉस्टल बनवाया,जिसमें बेटियों को ठहरने की सही व्यवस्था की,
याद रहे की मुझको पुराने लोगों से जानकारी मिली है कि करामत हुसैन मुस्लिम शिया समुदाय से थे
वह इस स्कूल की पूरी कमेटी मे शिया समुदाय के पढ़े पढ़े-लिखे लोग थे,
फ्रीलांसर
शाबू ज़ैदी
7617032786





