सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर दिल्ली हाईकोर्ट गंभीर, रोजाना मेडिकल जांच के निर्देश
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अमूल्य है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वांगचुक की प्रतिदिन मेडिकल जांच कराई जाए तथा स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तत्काल आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका यह अनशन अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लंबे समय से भोजन न लेने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार उनका वजन काफी कम हो चुका है और शरीर में कमजोरी बढ़ने के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का खतरा भी बढ़ गया है।
वांगचुक का यह आंदोलन देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे अभियान के समर्थन में है। आंदोलनकारी निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।
इस आंदोलन को देशभर के कई विपक्षी नेताओं, सांसदों, छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और फिल्म जगत की हस्तियों का समर्थन मिल रहा है। कई सांसद जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात कर चुके हैं और सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने भी वांगचुक के समर्थन में सांकेतिक उपवास रखने की घोषणा करते हुए सरकार से तत्काल संवाद शुरू करने की मांग की है।
दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब प्रशासन पर सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी स्थिति में प्रदर्शनकारी के जीवन और स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि वह उनकी नियमित चिकित्सा जांच कराए और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार उपलब्ध कराए।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की अगली कार्रवाई और आंदोलन के संभावित समाधान पर टिकी हुई हैं।
