पैग़म्बर-ए-इस्लाम एवं उम्मुल मोमिनीन के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग, ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन ने थाना चौक में सौंपी विधिक शिकायत

पैग़म्बर-ए-इस्लाम एवं लखनऊ, 11 जुलाई। ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत सैयद अयूब अशरफ़ किछौछवी के नेतृत्व में शनिवार को लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों उलेमा-ए-किराम, मशाइख़-ए-इज़ाम, सज्जादानशीन, इमाम, हाफ़िज़, क़ारी, अधिवक्ताओं तथा सामाजिक एवं धार्मिक प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने थाना चौक, लखनऊ पहुँचकर एक विस्तृत विधिक शिकायत एवं ज्ञापन पुलिस प्रशासन को सौंपा।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नाज़िया इलाही ख़ान द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया एवं यूट्यूब मंचों पर पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तथा उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका (रज़ियल्लाहु अन्हा) के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं, जिनसे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन से प्रकरण की निष्पक्ष जाँच कर विधि के अनुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने शिकायत-पत्र के साथ संबंधित वीडियो लिंक, उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज़ भी पुलिस को सौंपे, ताकि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधिकारियों को यह भी अवगत कराया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित याचिका के निस्तारण के दौरान शिकायतकर्ताओं को सक्षम पुलिस प्राधिकारी के समक्ष विधिक शिकायत प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी। उसी के अनुरूप आज थाना चौक में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया।

इस अवसर पर पुलिस प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें धार्मिक सौहार्द, सार्वजनिक शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के हित में निष्पक्ष, समयबद्ध एवं पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने तथा उसकी धार्मिक आस्था के सम्मान का अधिकार प्रदान करता है। किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्वों, पैग़म्बरों, महापुरुषों, धर्मग्रंथों अथवा धार्मिक प्रतीकों के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण एवं अपमानजनक टिप्पणियाँ सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक शांति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में निष्पक्ष जाँच एवं विधिसम्मत कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन की मूल भावना के अनुरूप है।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद या तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि संविधान और न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास रखते हुए विधिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से न्याय प्राप्त करना है। उन्होंने सभी नागरिकों से शांति, संयम, आपसी सद्भाव और कानून का सम्मान बनाए रखने की भी अपील की।

ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन सदैव राष्ट्रीय एकता, गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे, धार्मिक सद्भाव और संविधानसम्मत मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्य करता रहा है तथा भविष्य में भी समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए अपनी सकारात्मक भूमिका निभाता रहेगा।

इस अवसर पर हज़रत सैयद याकूब अशरफ़, हज़रत सैयद बाबर अशरफ़, हज़रत सैयद मोहम्मद अहमद मियाँ, हज़रत सैयद आले मोहम्मद, हज़रत सैयद जुनैद अशरफ़, मकसूद अशरफ़ सिद्दीकी, शादाब हयात ख़ान, पीर मोहम्मद, मोहम्मद रिज़वान, अब्दुल रहमान, मोहम्मद नौशाद, मुफ़्ती अव्वल नूरी, कारी अव्वल रज़ा कादरी, कारी ज़ुबैर मिस्बाही, हाफ़िज़ मोहम्मद असीम रज़ा, हाफ़िज़ कारी फारूक, कारी मोहम्मद इसराईल अमजदी, कारी इफ्तेखार आलम, मौलाना अशरफ़ हुसैन, मौलाना एहरार हुसैन, कारी शाहज़ाद हुसैन, कारी मुनीर ख़ान, मुफ़्ती फ़ैयाज़, मुफ़्ती शुएब अमजदी, कारी शाकिल, कारी मोहम्मद मिनहाज, हाफ़िज़ अली कादरी, हाफ़िज़ मुजाहिद रज़ा, कारी शाहिद, कारी गुलफ़ाम, हाफ़िज़ अबू तुराब, अशरफ़ अली (अधिवक्ता), इरफ़ान कादरी (अधिवक्ता), ताज मोहम्मद, कारी मोहम्मद अनुल अशरफ़ी, कारी मोहम्मद अनवर, कारी मोहम्मद तौसीफ़, कारी मोहम्मद कमाल, कारी नदीम सलार, सैयद ताहिर अशरफ़, कारी मोहम्मद सईद, सईद वारसी सहित बड़ी संख्या में उलेमा, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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